नामस्मरण, गुरु-शरण और सेवा का संदेश देकर श्रीकथा ज्ञान यज्ञ का समापन
अंतिम दिन नाणीजधाम तीर्थ दर्शन, ऑनलाइन नामदीक्षा, रासलीला और विशाल भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
महासमुंद। भगवान जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से महासमुंद में आयोजित तीन दिवसीय श्रीकथा ज्ञान यज्ञ का शुक्रवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के बीच समापन हुआ। अंतिम दिन नाणीजधाम तीर्थक्षेत्र के दर्शन, ऑनलाइन नामदीक्षा, श्री लीलामृत ग्रंथ पर आधारित प्रवचन, रासलीला, संध्या आरती तथा विशाल प्रसादी भंडारे का आयोजन हुआ। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
अंतिम दिवस की शुरुआत श्रद्धालुओं द्वारा तीर्थक्षेत्र नाणीजधाम के दर्शन से हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी से ऑनलाइन नामदीक्षा (नामदान) ग्रहण की। इस दौरान उन्हें भक्ति, सदाचार, सेवा और नामस्मरण को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया गया। रामानंद संप्रदाय की परंपरा में नामदान को गुरु-शिष्य संबंध और भक्ति-साधना की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है।
नामभक्ति से बढ़ती है एकाग्रता और विवेक
जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी ने ऑनलाइन प्रवचन के माध्यम से नामभक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मन स्वभाव से चंचल होता है और इसी कारण मनुष्य कई बार अपने लक्ष्य से विचलित हो जाता है। भक्ति के माध्यम से अंतरमन और बहिरमन की एकाग्रता बढ़ती है। इससे निर्णय क्षमता, संयम, विवेक, साहस और सकारात्मक चिंतन का विकास होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित नामस्मरण, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर करते हैं
कथा व्यास प्रवचनकार रोहित मुड़े ने श्री लीलामृत ग्रंथ पर आधारित प्रवचन में सद्गुरु के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। सद्गुरु की संगति और मार्गदर्शन से मनुष्य के भीतर आध्यात्मिक जागरण होता है तथा वह सत्य और प्रकाश के मार्ग पर आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु नरेंद्राचार्यजी के मार्गदर्शन में भक्ति, नामस्मरण, सेवा और सदाचार को जीवन का आधार बनाकर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
लोककल्याणकारी सेवा कार्यों की दी जानकारी
आयोजन के दौरान जगद्गुरु नरेंद्राचार्यजी की प्रेरणा से संचालित विभिन्न लोककल्याणकारी एवं मानवतावादी सेवा कार्यों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सेवा कार्यों के तहत 1,56,129 से अधिक परिवारों की घर-वापसी, 250 देहदान और 219 अवयवदान किए जा चुके हैं। वहीं जनवरी 2026 में 15 दिनों के दौरान 1,71,150 यूनिट रक्तदान तथा 5 से 19 जुलाई 2026 के बीच 6,18,009 पौधों का वृक्षारोपण किया गया। जरूरतमंद मरीजों के लिए ‘ब्लड इन नीड’ हेल्पलाइन 9619171004 भी संचालित की जा रही है।
रासलीला ने बांधा समां, भंडारे में उमड़ी भीड़
तीन दिवसीय श्रीकथा ज्ञान यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान की कथा, भक्ति और गुरु-शिष्य परंपरा का श्रवण किया। समापन दिवस की संध्या में रासलीला और आरती का आयोजन हुआ। रासलीला के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव में भावविभोर नजर आए। इसके बाद आयोजित विशाल प्रसादी भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में रामानंद संप्रदाय छत्तीसगढ़ के उपपीठ प्रमुख घनश्याम माहेश्वरी, पीठ सदस्य सच्चिदानंद उपासने, पीठ सह प्रमुख मुन्नालाल मोटघरे एवं पीठ व्यवस्थापक प्रकाश अंगाडे सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अध्यक्ष, निरीक्षक, समिति सदस्य तथा छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में रामानंद संप्रदाय के पदाधिकारियों, विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ताओं, समिति सदस्यों और श्रद्धालुओं का योगदान रहा। पूरे आयोजन में जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी की प्रेरणा, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्रमुख केंद्र रहा।
