मौत के बाद भी मानवता की सेवा का संकल्प, तीन चेहरों ने पेश की मिसाल

शीला प्रधान के साथ निलेश खांडे-चित्ररेखा तारक दंपती ने किया देहदान का संकल्प; रक्तदान और नेत्रदान से भी जुड़े हैं सेवा के सरोकार
महासमुंद। सेवा संकल्प अभियान के तहत मनाए जा रहे दान उत्सव और गांधी जयंती के अवसर पर महासमुंद जिले में सेवा और परोपकार की ऐसी प्रेरणादायी मिसाल सामने आई है, जो बताती है कि मानव सेवा की कोई अंतिम सीमा नहीं होती। महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक शीला प्रधान तथा आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक निलेश खांडे और उनकी पत्नी चित्ररेखा तारक ने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लेकर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
महासमुंद निवासी शीला प्रधान ने अपना देहदान घोषणा-पत्र कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को सौंपा। सेवा सेतु शिविर कोसरंगी में उनके इस पुनीत संकल्प के लिए शाल, श्रीफल और गुलदस्ता भेंटकर सम्मानित किया गया तथा प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। एकल महिला शीला प्रधान ने अपना जीवन परोपकार और समाजसेवा के लिए समर्पित करने की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानव कल्याण में काम आए, इससे बड़ी सार्थकता उनके लिए कुछ नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि यही उनके लिए मृत्यु के बाद की वास्तविक सेवा और मोक्ष होगा।
इसी तरह गांधी जयंती के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक निलेश खांडे और उनकी पत्नी चित्ररेखा तारक ने भी देहदान का संकल्प-पत्र भरा। दंपती इससे पहले नेत्रदान का संकल्प भी ले चुका है। निलेश खांडे अब तक 47 बार और चित्ररेखा तारक 6 बार रक्तदान कर जरूरतमंदों की मदद कर चुके हैं।
भावी डॉक्टरों की पढ़ाई से लेकर चिकित्सा शोध तक आएगा काम
देहदान का महत्व केवल एक संकल्प तक सीमित नहीं है। चिकित्सा शिक्षा में दान की गई देह मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की वास्तविक संरचना समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके माध्यम से भावी चिकित्सक शरीर रचना विज्ञान का व्यावहारिक अध्ययन करते हैं। वहीं चिकित्सा अनुसंधान और नई सर्जिकल तकनीकों के विकास में भी देहदान उपयोगी साबित होता है। इस तरह एक व्यक्ति का देहदान भविष्य में अनगिनत मरीजों के उपचार की दिशा में अप्रत्यक्ष योगदान बन सकता है।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने शीला प्रधान तथा निलेश खांडे-चित्ररेखा तारक दंपती के निर्णय की सराहना करते हुए इसे मानव सेवा की अनुकरणीय भावना बताया। आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शिल्पा साय सहित अन्य अधिकारियों ने भी दंपती के इस निर्णय की प्रशंसा की।
इन तीनों के संकल्प की खास बात यह है कि इन्होंने सेवा को केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं रखा। जीते जी रक्तदान और नेत्रदान से जरूरतमंदों की मदद करने के बाद अब मृत्यु के उपरांत भी उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानव कल्याण के काम आएगा। उनका यह कदम समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और अधिक लोगों को मानवता के इस महादान के लिए प्रेरित करने वाला संदेश है।