25.45 लाख परिवारों को राशन नहीं मिलने का दावा, चंद्राकर ने सरकार को घेरा
कहा- दो माह का राशन देने के प्रचार के बीच गरीब परिवारों को महीने के अंत तक भी नहीं मिला चावल, महासमुंद के कई गांवों से शिकायतें
महासमुंद। प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण में देरी को लेकर पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि सितंबर 2026 के अंत तक छत्तीसगढ़ में करीब 25.45 लाख राशन कार्डधारी परिवारों को चावल नहीं मिल पाने की स्थिति सामने आई है। चंद्राकर ने इसे सरकार की कथित उदासीनता और प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता बताया है।
चंद्राकर ने कहा कि सरकार एक ओर दो माह का राशन एक साथ देने का प्रचार कर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद परिवार महीने के अंतिम दिनों तक राशन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उचित मूल्य की दुकानों में समय पर पर्याप्त मात्रा में चावल उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई।
महासमुंद के कई गांवों में राशन नहीं मिलने की शिकायत
पूर्व विधायक के अनुसार, महासमुंद जिले के अछोली, मचेवा, मानपुर सहित कई गांवों से राशन उपलब्ध नहीं होने और हितग्राहियों के खाली हाथ लौटने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि शासन ने 30 सितंबर तक दो माह का राशन वितरित करने की व्यवस्था की थी, लेकिन बड़ी संख्या में हितग्राहियों को निर्धारित समय तक चावल नहीं मिल पाया।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लाखों परिवार राशन का इंतजार कर रहे हैं। निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बीच गरीब परिवारों की परेशानी बढ़ना सरकार की वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
शक्कर की उपलब्धता पर भी उठाए सवाल
चंद्राकर ने राशन दुकानों में शक्कर की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई दुकानों में लंबे समय से शक्कर उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं। इसके चलते गरीब परिवारों को बाजार से अधिक कीमत पर शक्कर खरीदनी पड़ रही है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
‘घोषणा नहीं, समय पर लाभ पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी’
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल योजनाओं की घोषणा और प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना भी उसका दायित्व है। गरीब परिवारों के लिए राशन जीवन-यापन का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में वितरण में देरी का सीधा असर उनके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि राशन वितरण की समय-सीमा बढ़ाई जाए, सभी उचित मूल्य दुकानों में पर्याप्त मात्रा में चावल, शक्कर एवं अन्य आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए तथा जिन हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं मिला है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर राशन दिया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए वितरण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है।
