सेवा की कहानी – प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से श्रीमती कुन्ती बाई निषाद ने मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में हासिल की आत्मनिर्भरता
– मत्स्य बीज विक्रय से मिला 5 लाख 50 हजार रूपए का शुद्ध लाभ
राजनांदगांव 24 सितम्बर 2026।प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन के नए अवसर सृजित कर रही है। योजना के माध्यम से मत्स्य पालन को व्यावसायिक रूप देकर हितग्राहियों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता को भी बढ़ावा मिल रहा है। डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम अण्डी की श्रीमती कुन्ती बाई निषाद ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर मत्स्य बीज उत्पादन एवं विक्रय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत फिन फिश हैचरी एवं संवर्धन पोखर की इकाई स्थापित कर अपने व्यवसाय को नई दिशा दी। इस पहल से वे आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य मत्स्य पालकों को भी गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
श्रीमती कुन्ती बाई निषाद ने बताया कि मत्स्य बीज उत्पादन एवं विक्रय के उद्देश्य से स्थापित इस परियोजना की कुल लागत 25 लाख रूपए थी, जिसमें शासन द्वारा 15 लाख रूपए का अनुदान प्रदान किया गया। उन्होंने हैचरी एवं संवर्धन तालाब के माध्यम से मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया। इकाई में 11 करोड़ स्पॉन तथा 1 करोड़ स्टे फ्राई का उत्पादन किया गया। मत्स्य बीज उत्पादन पर लगभग 4 लाख रूपए व्यय हुए और इसके विक्रय से 5 लाख 50 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। साथ ही क्षेत्र के मत्स्य पालकों को स्थानीय स्तर पर समय पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उपलब्ध हो रहा है, जिससे उन्हें अन्य जिलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मिले सहयोग के लिए श्रीमती कुन्ती बाई निषाद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाएं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
