भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती पर हुल क्रांति दिवस का गरिमामय आयोजन सम्पन्न
अम्बिकापुर 30 जून 2026/ भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के अवसर पर हुल क्रांति दिवस का गरिमामय आयोजन मंगलवार को पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम, अंबिकापुर में सम्पन्न हुआ। जिला प्रशासन सरगुजा एवं आदिम जाति विकास विभाग, सरगुजा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में सरगुजा जिले के 14 जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों सहित लगभग 1,500 लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुण्डा, शहीद वीर नारायण सिंह, मांझी राम गोड़, सिद्धू-कान्हू, समाज सुधारक राजमोहनी देवी, संत गहिरा गुरु एवं जगदेव राम उरांव के छायाचित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ।
इसके पश्चात 14 जनजातीय समाजों के प्रमुखों ने मुख्य अतिथि डॉ. आशा लकड़ा का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। अपने उद्बोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अधिकारों, कर्तव्यों एवं कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि आयोग अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने भगवान बिरसा मुण्डा के संघर्ष, नेतृत्व एवं जनजातीय अस्मिता की रक्षा में उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करते हुए हुल क्रांति के महानायक सिद्धू-कान्हू के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने जनसुनवाई भी की, जिसमें विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं एवं सुझावों से उन्हें अवगत कराया।
इस अवसर पर उरांव, कंवर, मांझी, गोंड, खैरवार, पंडो, नागवंशी, मझवार, नगेसिया, कोरवा, बिंझिया, मुण्डा, भुईया एवं पहाड़ी कोरवा समाज सहित विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रमुख उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, संघर्ष एवं बलिदान को स्मरण करना तथा नई पीढ़ी में जागरूकता, स्वाभिमान और प्रेरणा का संचार करना रहा।
कार्यक्रम के अंत में सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, जिला सरगुजा डॉ. ललित शुक्ला ने सभी अतिथियों, समाज प्रमुखों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।
