ब्रम्हाकुमारी संस्थान में मनाई गई होली

महासमुंद। आंतरिक पवित्रता, आत्मिक परिवर्तन, और मनोविकारों का दहन का प्रतीक पर्व होली ब्रम्हाकुमारीज के स्थानीय सेवाकेंद्र उपकार भवन में मनाया गया। ईश्वरीय परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर गीत संगीत के साथ होली पर्व मनाया। ब्रम्हा कुमारी बहनों ने अतिथियों पर फूलों की वर्षा करते हुए अलौकिक रीति की होली मनाई। सेवा केंद्र संचालिका ब्रम्हा कुमारी प्रीति दीदी ने सभी को आत्मस्मृति का तिलक लगाकर बधाई व शुभकामनाएं दीं, छोटे बच्चों ने नृत्य संगीत के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रीति दीदी ने होली पर्व के आध्यात्मिक रहस्य खोलते हुए कहा, होली पर्व केवल रंगों का खेल नहीं बल्कि आंतरिक बुराईयों काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार को योग की अग्नि में जलाकर पवित्र बनने का आध्यात्मिक पर्व है। यह स्वयं को परमात्मा के प्रेम के गुणों के रंगों से सराबोर कर दिव्य गुणों को धारण करने का शुभ अवसर है। लकड़ियां जलाना अर्थात मन की विकृतियों और पुरानी आदतों को ज्ञान की अग्नि में भस्म करने का प्रतीक है।