ग्राम सभाओं के जरिए सहेजी जाएगी विरासत

‘ज्ञान भारतम्’ अभियान से पांडुलिपि संरक्षण को नया बल
बिलासपुर,23 अप्रैल /संस्कृति मंत्रालय की पहल ‘ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण’ के तहत देश की अमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए अब ग्राम स्तर पर भी व्यापक प्रयास शुरू हो गए हैं। इस अभियान में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित कर सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।
भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, संस्कृति, विज्ञान और दर्शन को संजोए रखने वाली पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से न केवल पांडुलिपियों का सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, बल्कि उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। अभियान के तहत ‘ज्ञान भारतम् मोबाइल एप’ विकसित किया गया है, जिसके जरिए कोई भी नागरिक मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी से लॉगिन कर पांडुलिपियों की जानकारी दर्ज कर सकता है। उपयोगकर्ता व्यक्तिगत रूप से, मंदिर ट्रस्ट, विश्वविद्यालय या अन्य संस्थान के प्रतिनिधि के रूप में भी पंजीयन कर सकते हैं। एप पर उपलब्ध पांडुलिपियों की तस्वीरें अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस दिशा में राज्य स्तरीय स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है। वहीं बिलासपुर जिले में जिला स्तरीय समिति गठित कर अभियान को गति दी गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार अग्रवाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिले में 8 मास्टर ट्रेनर और 494 अन्वेषकों की नियुक्ति कर उनका प्रशिक्षण भी पूरा किया जा चुका है। बिलासपुर में इस अभियान को ग्राम सभाओं तक ले जाकर एक अभिनव पहल की गई है। ग्राम स्तर पर बैठकों में पांडुलिपियों के महत्व पर चर्चा की जा रही है और ग्रामीणों को इन्हें सुरक्षित रखने एवं सूचीबद्ध करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे गांवों में छिपी हुई दुर्लभ पांडुलिपियों को पहचानने और संरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।यह पहल न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि स्थानीय समुदायों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।