पंचायतों की आर्थिक बदहाली,15वें वित्त की राशि शीघ्र जारी करें: सृष्टि
महासमुंद। जिला पंचायत सदस्य सृष्टि अमर चंद्राकर ने त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के एक वर्ष पूर्ण होने के बावजूद पंचायतों के खाली पड़े खातों को लेकर राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार में पंचायतें आर्थिक बदहाली की कगार पर पहुंच चुकी हैं और गाँवों का विकास सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो गया है।
सृष्टि ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को बने दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, जबकि पंचायत चुनाव को भी एक वर्ष पूरा हो गया है। इसके बावजूद ग्रामीण विकास की धुरी मानी जाने वाली पंचायतें कमजोर स्थिति में खड़ी हैं। गांवों के विकास का दावा करने वाली सरकार के कार्यकाल में पंचायतों के बैंक खाते खाली पड़े हैं और विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद न तो पंचायतों के लिए कोई नई ठोस योजना शुरू की गई और न ही पिछली सरकार के समय की 15वें वित्त आयोग की लंबित राशि जारी करने में गंभीरता दिखाई गई। परिणामस्वरूप पंचायतें केवल नाम मात्र की रह गई हैं। सृष्टि के अनुसार, सरपंच, पंच, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य ‘‘डमी प्रतिनिधि’’ बनकर रह गए हैं। धन के अभाव में वे अपने गांवों में कोई ठोस कार्य नहीं करा पा रहे। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में महासमुंद ब्लॉक के पंचायत प्रतिनिधियों ने 15वें वित्त की राशि की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद साल में चार किश्तों में मिलने वाली राशि में से केवल एक किश्त जारी की गई, जिस पर भी तकनीकी कारणों से आहरण रोक दिया गया।? वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत रुकी हुई है, नालियां जर्जर हैं और पेयजल संकट गहराता जा रहा है। जब पंचायतों के पास खर्च करने के लिए पैसा ही नहीं होगा, तो विकास किस आधार पर होगा? यह सवाल आज हर पंचायत प्रतिनिधि पूछ रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को आर्थिक रूप से पंगु बनाना न केवल ग्रामीण विकास को बाधित करता है, बल्कि 73वें संविधान संशोधन की भावना के भी विपरीत है। अंत में उन्होंने मांग की कि 15वें वित्त आयोग की पूर्ण राशि शीघ्र जारी की जाए, ताकि गांवों में विकास कार्य पुन: शुरू हो सकें और मूलभूत सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।
