ग्राम सेंदर के किसानों ने फसल चक्र अपनाकर की नई मिसाल
कम पानी में रागी, सरसों की खेती से किसानों बढ़ी आय
स्वास्थ्य और पोषण के लिए फसल परिवर्तन जरूरी
गरियाबंद, 13 अप्रैल 2026/ फिंगेश्वर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सेंदर के किसान आज फसल चक्र अपनाकर जल संरक्षण और बेहतर आय की दिशा में एक नई मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं। पहले वे ग्रीष्म ऋतु में अधिक पानी, मेहनत और लागत वाली धान की फसल लिया करते थे। वहीं अब बदलते परिदृश्य को देखते हुए किसान कम पानी में होने वाली फसलों का चयन कर रहे हैं।
गॉव के किसान भगवानी साहू ने पिछले दो वर्षों से रागी की खेती कर रहे है। वे बताते है कि रागी में धान की तरह लगातार पानी भरकर रखने की जरूरत नहीं होती, बल्कि महीने में केवल एक बार हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है। लगभग चार माह की इस फसल में प्रति एकड़ 8 से 12 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि खाद, निंदाई-गुड़ाई सहित लगभग 8 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है, जो धान की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कृषि विभाग बीज निगम गरियाबंद में पंजीयन कराया है। जिससे उन्हें रागी की खरीदी 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। जिससे किसानों को बेहतर फायदा मिल रहा है।
इसी से प्रेरित होकर ग्राम के ही कृषक एवं व्यवसायी तुलसी राम साहू ने भी फसल विविधीकरण अपनाया। उन्होंने 5 एकड़ में रागी एवं 7 एकड़ में सरसों की खेती की है। उनके सरसों की फसल तैयार हो चुकी है, जबकि रागी पकने की स्थिति में है। सरसों में भी केवल 3 से 4 बार कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है, जिससे पानी की बचत होती है। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ 3 से 6 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होती है। जिसकी बाजार में 6 हजार 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री हो जाती है।
स्वास्थ्य एवं पोषण की दृष्टि से भी यह फसलें अत्यंत लाभकारी हैं। रागी में कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, फाइबर एवं विटामिन बी समूह प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वहीं सरसों में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, कैल्शियम एवं एंटीऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
ग्राम सेंदर के किसानों की यह पहल न केवल जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम है, बल्कि कम लागत में अधिक मुनाफा अर्जित करने का माध्यम भी बन रही है। किसानों को बदलते समय के अनुसार फसल चयन कर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए आर्थिक उन्नति करना चाहिए।
