मौसम का बदला मिजाज: आसमान में दिन भर छाए रहे बादल, हुई बूंदाबांदी
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डंप पड़े धान उठाव की कछुआ गति से खराब होने की आशंका
महासमुंद। अचानक से मौसम का मिजाज बदलने से आज सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहा, जिससे हल्की बूंदाबांदी भी हुई। वही मौसम विभाग ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है।
दरअसल 15 जनवरी को सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। एक महीने बाद अब अधिकतम व न्यूनतम तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। हालांकि देर रात और अल सुबह गुलाबी ठंड का एहसास होता है और दिनभर तेज धूप। आज सुबह से आसमान में हल्के बादल छाए रहे। मौसम विभाग के अनुसार 22 फरवरी की दोपहर से ही दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना सुस्पष्ट निम्न दबाव बना हुआ है। इससे संबंधित चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर तक फैला हुआ था। संभावना है कि यह प्रारंभ में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा और फिर अगले 48 घंटों के दौरान धीरे-धीरे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ जाएगा। वहीं दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र से लेकर मध्य तमिलनाडु और आंतरिक कर्नाटक से होते हुए मध्य महाराष्ट्र तक समुद्र तल से 0.9 किमी ऊपर स्थित द्रोणिका बनी हुई है। मध्य क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में बनी द्रोणिका का अक्ष समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर लगभग 93 पूर्व देशांतर के अनुदिश और अक्षांश 24 उत्तर के उत्तर में स्थित है। जिससे एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा और एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना जताई है।
आगामी दिनों में मौसम का हाल
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी होगी। आज दोपहर 12 बजे तक अधिकतम 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि सप्ताह अंत यह 2 डिग्री और बढ़ने की संभावना है। मौसम में हो रही बदलाव के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। सुबह और रात में ठंड दिनभर कड़ी धूप से लोग बीमार हो रहे हैं। जिसमें सर्दी, खसी और बुखार के मरीज ज्यादा हैं।
खराब हो सकता है केन्द्रों में रखा धान
जिले में खरीदी समाप्त होने के बाद उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव प्रारंभ हो गया है। लेकिन, उठाव कछुआ गति से होने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के उपार्जन केंद्रों में अब भी लगभग 62 लाख क्विंटल धान डंप है, जबकि अब तक सिर्फ 48 लाख क्विंटल धान का उठाव हो पाया है। उठाव में हो रही देरी से न केवल समितियों की परेशानी बढ़ रही है। इधर ,आज हल्के बादल छाने के साथ ही बारिश का भी अनुमान है। यदि ऐसा होता है तो केन्द्रों में डंप धान खराब हो सकता है। गौरतलब है कि शासन द्वारा 17 से 31 जनवरी तक धान परिवहन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद उठाव शुरू हुआ, लेकिन गति धीमी बनी रहीं, इससे उपार्जन केंद्रों में धान का भारी दबाव बन गया है।
