सूचना के अधिकार और जैविक खादों के उपयोग पर संभाग स्तरीय प्रशिक्षण संपन्न
दुर्ग, 10 अप्रैल 2026/ क्षेत्रीय कृषि प्रसार एवं प्रशिक्षण संस्थान रुआबांधा, दुर्ग में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 तथा हरी खाद, नील-हरी शैवाल एवं जैव उर्वरकों पर एक दिवसीय संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सूचना आयुक्त शिरिष चंद्र मिश्रा ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह अधिनियम शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को आवेदकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सदैव सजग रहने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग की अवर सचिव श्रीमती गीता दीवान और मास्टर ट्रेनर अतुल वर्मा ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से सूचना प्रदाय की ऑनलाइन प्रक्रिया, शुल्क भुगतान और अधिनियम के संशोधित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। संयुक्त संचालक कृषि श्रीमती गोपिका गबेल ने अधिकारियों को रिकॉर्ड्स का व्यवस्थित संधारण करने और आवेदनों के त्वरित निराकरण की समझाइश दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण अधिकारियों को अपनी जानकारी अपडेट करने और शंकाओं के समाधान का बेहतर अवसर प्रदान करते हैं। द्वितीय सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र पाहंदा के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में हरी खाद, नील-हरी शैवाल और जैव उर्वरकों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि जीवामृत, बीजामृत और नैनो यूरिया जैसे विकल्प फसलों की पोषक आवश्यकताओं को काफी हद तक पूरा कर सकते हैं। संयुक्त संचालक कृषि ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान इन वैकल्पिक खादों की उत्पादन तकनीक को गांव-गांव तक पहुँचाया जाए। इस अवसर पर संभाग के सभी जिलों के लगभग 100 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे ।
