घेराव करने जा रहे किसानों को पुलिस ने रोका तो सड़क पर ही बैठ गए, कर दिया चक्काजाम
ट्रैक्टर रैली निकालकर कावेरी प्लांट के लिए निकले थे प्रभावित
महासमुंद। कावेरी बीज कंपनी द्वारा करीब पौने चार करोड़ रुपये का बकाया भुगतान न किए जाने से नाराज घेराव करने निकले सैंकड़ों किसान और मजदूरों को शुक्रवार को जब पुलिस प्रशासन ने बेलसोंडा में रोका, तो आक्रोशित किसानों ने नेशनल हाईवे 353 पर ही डेरा डाल दिया और सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। हाईवे पर घंटों तक यातायात प्रभावित रहा और प्रशासन के साथ किसानों की तीखी नोकझोंक भी हुई।
पूरा मामला वर्ष 2024-25 के रबी सीजन से जुड़ा है। कंपनी ने छत्तीसगढ़ के 132 किसानों की जमीन लीज (रेग) पर लेकर बीज उत्पादन कराया था। किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन दी, मजदूरों ने दिन-रात मेहनत की, मशीनें चलीं और उत्पादन पूरा हुआ। लेकिन काम खत्म हुए आठ महीने बीत जाने के बाद भी न तो जमीन का किराया दिया और न ही मजदूरों का मेहनताना। किसानों का कहना है कि वे महीनों से शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे थे। जिला प्रशासन महासमुंद को पूर्व में अवगत कराया गया, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरन ट्रैक्टर रैली निकालकर प्लांट का घेराव करने निकलना पड़ा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने बताया कि कंपनी पर 3,23,26,388 रुपये मूल राशि बकाया है। जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक 2% मासिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि बढ़कर 3,74,98,610 रुपये तक पहुँच चुकी है।
जल्द भुगतान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने कहा कि यह सिर्फ पैसों का मामला नहीं, यह किसानों के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है। प्रदर्शन के दौरान कई किसान भावुक हो उठे। उनका कहना था कि भुगतान न मिलने से परिवार आर्थिक संकट में हैं। कई किसान साहूकारों और बैंकों के कर्ज में दब चुके हैं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
