ग्रामीणों को दी गई विकसित भारत रोजगार व आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम की जानकारी

कोंडागांव, 31 दिसम्बर 2025/ कोंडागांव विकासखंड के ग्राम पंचायत बयानार में गत दिवस विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम 2025 के संबंध में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। राज्य सरकार के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत के सीईओ अविनाश भोई के मार्गदर्शन में आयोजित इस इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को नए कानून के प्रावधानों, इससे होने वाले लाभों और भविष्य में इसके क्रियान्वयन के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही डबरी निर्माण से आजीविका में सुधार को लेकर भी जानकारी दी गई। यह नया कानून ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका को नई दिशा देने के उद्देश्य से लाया गया है, जो अब मनरेगा का स्थान लेगा। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अब ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिन के स्थान पर 125 दिन का रोजगार प्रदान किया जाएगा। योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराकर उनका सशक्तिकरण करना है। कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इसमें डिजिटलाइजेशन और आधुनिक टेक्नोलाजी का व्यापक उपयोग किया जाएगा। विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को बताया गया कि इस अधिनियम के अंतर्गत मुख्य रूप से जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, वाटरशेड विकास, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, वनीकरण और पारंपरिक जल स्त्रोतों के जीर्णाेद्धार जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन प्रयासों से न केवल ग्राम्यांचल की मूलभूत ग्रामीण अवसंरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकुलन क्षमताओं का भी विकास होगा। वित्तीय व्यवस्था के संदर्भ में यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60रू40 के अनुपात में निर्धारित की गई है। अधिनियम में श्रमिकों के हितों का विशेष ध्यान रखते हुए सात दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की गारंटी दी गई है और तय समय सीमा में काम उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इस दौरान ग्रामीणों को आजीविका के नए अवसरों और कौशल विकास के प्रति जागरूक किया गया।