अमृत सरोवर बना ग्रामीणों के लिए आजीविका का केंद्र, 14 एकड़ में सिंचाई

कोरिया 12 सितम्बर 2025। मानव निर्मित तालाब प्रकृति में जलसंरक्षण एवं भूमिगत जल संवर्धन की सबसे प्राचीन व्यवस्था है। इसे आगे बढ़ाते हुए भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा बीते वर्षों से मिशन अमृत सरोवर नामक अभियान चलाया गया है जिसका लाभ अब ग्रामीण क्षेत्रों में परिलक्षित होने लगा है। बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत के ग्राम बिशुनपुर में एक पुराना तालाब गाद जमने से अनुपयोगी हो गया था परंतु मिशन अमृत सरोवर के तहत उसके नवीनीकरण के बाद यह ग्राम पंचायत का एक बेहतरीन बहुपयोगी जल संसाधन बन गया है। आज इस अमृत सरोवर में पहले से तीन गुना ज्यादा जलभराव क्षमता हो चुकी है और अब आस पास के कई एकड़ खेतों में सिंचाई के लिए इस संसाधन का उपयोग हो रहा है। साथ ही यहां होने वाली मछलीपालन जैसी आजीविका गतिविधियों से महिलाओं के समूह को एक अतिरिक्त स्वरोजगार भी मिल रहा है।
ऐसे तालाब जिनका क्षेत्रफल एक एकड़ या उससे अधिक है और वह गाद जमने या अतिक्रमण का शिकार होकर अनुपयोगी हो चले हैं उन्हे इस अभियान के तहत चयनित किया गया है। उनका जीर्णाेद्धार करते हुए कम से कम 10 हजार घनमीटर जलभराव क्षमता लायक बनाया गया और इन तालाबों में मछलीपालन जैसी आजीविका गतिविधियों को सुनिश्चित किया गया है। साथ ही जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यहां राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण, स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, योग दिवस जैसी कई गतिविधियों को संपादित कराया जा रहा है।
बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बिशुनपुर में स्थित तालाब को ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मिशन अमृत सरोवर के अंतर्गत नवीनीकरण कार्य हेतु 9 लाख 14 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। कार्य की एजेंसी ग्राम पंचायत द्वारा कार्य पूर्णता के बाद इस तालाब के एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में 10 हजार घनमीटर से ज्यादा जलभराव क्षमता हो गई है। यह इसकी जलभराव की पूर्व क्षमता से लगभग तीन गुना ज्यादा हो गई है।

इन्हें भी पढ़े