समितियों में न पहुंचाकर खुले बाजार में बेची जा रही डीएपी खाद : विनोद
डबल इंजन की सरकार किसानों के लिए बनी परेशानी का सबब
महासमुंद। छ.ग. शासन के पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में कथित डबल इंजन की सरकार किसानों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। पूरे प्रदेश में किसानों को भाजपा निर्मित कृत्रिम खाद संकट का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों को डीएपी खाद की सप्लाई ना कर सरकार द्वारा खुले बाजार में अधिक दाम पर बेचने उपलब्ध करा दी गई है। सरकार के दोहरे चरित्र के चलते उनका किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। डीएपी संकट को लेकर आएदिन प्रशासनिक अमला यह कह रहा है, कि केंद्र द्वारा प्रदेश को डीएपी की सप्लाई न होने के कारण यह संकट उत्पन्न हुई है। यदि ऐसा है तो निजी दुकानों में डीएपी का स्टॉक कहां से किया जा रहा है। प्रदेश में केवल शासकीय दुकानों में ही किसानों को डीएपी उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जबकि खुले बाजार में भारी मात्रा में डीएपी उपलब्ध है। जिसे ऊँचे दरों पर बेचा जा रहा है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि शासन-प्रशासन केंद्र से पूरे प्रदेशभर में डीएपी खाद की सप्लाई नहीं होने की जानकारी दे रहा, ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जिला सहित पूरे प्रदेश में केंद्र से डीएपी खाद की सप्लाई नहीं होने की बात कही जा रही है, तो निजी दुकान संचालकों के पास कहां से उपलब्ध हो रही है। सोसाइटियों में डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद उपलब्ध है, लेकिन यह खाद डीएपी की तुलना में काफी महंगी है। समितियों में डीएपी का मूल्य 1350 रुपए निर्धारित है। यह खाद कृषि केंद्रों में 1700 से 1800 रूपए तक बिक रही है। इसके अलावा डीएपी लेने वाले किसानों को लादन थमाया जा रहा है। लादन नहीं लेने पर उन्हें डीएपी भी नहीं दी जा रही है।श्री चंद्राकर ने कहा कि खाद की कालाबाजारी कर किसानों को परेशान करने काम भाजपा की साय सरकार कर रही है। कमीशन का खेल प्रदेश भर में चल रहा है।
