नववर्ष के स्वागत में कवियों ने बिखेरी काव्य छॅटा

महासमुंद। आस्था साहित्य समिति महासमुंद द्वारा नववर्ष 2025 के स्वागत में साहित्यकार एस. चंद्रसेन के निवास जीवन सदन त्रिमूर्ति काॅलोनी महासमुंद में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्यप्रेमी दाऊलाल चंद्राकर एवं शिक्षाविद केआर चंद्राकर उपस्थित थे। काव्य गोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार आनंद तिवारी पाैराणिक ने नववर्ष का स्वागत करते हुए कहा कि जन-जन का हो उत्कर्ष स्वागतम नव वर्ष, उन्होंने कहा कि केवल अंधेरी रात की ही क्यों? चर्चा सुप्रात की भी हो। साहित्यकार एस. चंद्रसेन ने कहा कि ‘‘वही सूरज है वही चांद है, वही धरती और वही सृष्टि, हे ईश्वर दे देना नये साल में उच्च विचार और समदृष्टि’’। नववर्ष का स्वागत करते हुए कवि हृदय उमेश भारती गोस्वामी मृदुल ने गोष्ठी में नई ऊँचाईयां दी ‘‘शिक्षा और संस्कार मिले तो होगा अपना परम विकास, देखों बदल रहा है भारत का इतिहास’’। वर्तमान परिदृश्य को उजागर करते हुए कवि व गीतकार सुरेंद्र अग्निहोत्री ‘आगी’ ने कहा कि ‘‘सुख शांति समृद्धि साैहार्द्र, चहूं ओर बिखराएं, नए साल में न युद्ध कहीं यह दाैर थम जाए’’।
समाजसेवी व साहित्यकार एस. आर. बंजारे ने पंक्तियां समर्पित करते हुए कहा कि ‘‘वो फरिश्ता कहां से लाऊँ, जो सारे गम मिटा दे, खुशियांें की करे बारिश आंखों से नम हटा दे’’। साहित्यकार टेकराम सेन ‘चमक’ ने नववर्ष का अभिंनदन कुछ यूं कहते हुए किया ‘‘मन के मनदीर ह तेल रहत ले बरथे, परेम के दिया हर जीवन भर जगमग करथे’’। उन्होंने कहा कि ‘‘खेतों व पगडंडियों पर धूल भर पाँवों को, जंगल में बसते छोटे से गाँव को नए साल की शुभकामनाएं’’।
काव्य गोष्ठी का शानदार अंदाज में संचालन करते हुए साहित्यकार सरिता तिवारी ने पंक्तियां दी ‘‘जाते-जाते साल गम ये दे गया बेवफा कीमती साल ये ले गया’’। इस अवसर पर वरिष्ठ समाज सेवी दाऊलाल चंद्राकर ने कहा कि आस्था साहित्य समिति साहित्यिक हल चल को बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाया है। निश्चित ही सभी बधाई के पात्र है। शिक्षाविद् केआर चंद्राकर ने कहा कि नववर्ष 2025 सभी के जीवन में खुशियां बिखेरे एवं हम सभी काव्य का आनंद लेते रहे। उक्त जानकारी साहित्यकार टेकराम सेन ‘चमक’ ने दी है।