एसआईआर के बहाने 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकार पर चोट का आरोप, कांग्रेस ने मांगा सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
महासमुंद। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की आब्जर्वर एवं धुले लोकसभा सांसद डॉ. शोभा बच्छाव तथा प्रदेश सह प्रभारी विजय जांगिड़ ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया महज मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों मतदाताओं के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश के 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काटे जाने का मामला बेहद गंभीर है। उनका आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर करने की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। पार्टी ने मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें स्पष्ट कारण बताया जाए और उन्हें प्रभावी ढंग से आपत्ति दर्ज कराने तथा अपील का अवसर दिया जाए।
‘39 लाख मतदाता अचानक कैसे बढ़े?’
कांग्रेस ने महाराष्ट्र के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए मतदाता संख्या में हुई वृद्धि पर सवाल उठाया। पार्टी नेताओं के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच करीब 39 लाख मतदाता जुड़े, जबकि इससे पहले पांच वर्षों में लगभग 32 लाख मतदाता जुड़े थे। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में नए मतदाता कैसे जुड़े और उनका पंजीकरण किस अवधि में हुआ।
पार्टी ने राहुल गांधी द्वारा महाराष्ट्र के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस ने दोहरे पंजीकरण, संदिग्ध तस्वीरों, फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग सहित अन्य विसंगतियों की स्वतंत्र जांच की मांग की। हालांकि पार्टी ने कहा कि आरोपों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक जांच के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि होनी चाहिए।
‘चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल’
प्रदेश सह प्रभारी विजय जांगिड़ ने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है। ऐसे में उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था में हुए बदलाव तथा चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण की धारा 16 को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा कि आधिकारिक कर्तव्यों के नाम पर जवाबदेही कमजोर नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सुखबीर संधू और जोशी द्वारा 14 बार आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पार्टी ने इन आपत्तियों पर भी स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस ने एसआईआर के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान करते हुए तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं-
पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
दूसरी, एसआईआर प्रक्रिया को निरस्त करना।
तीसरी, प्रभावित 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम पुनः मतदाता सूची में शामिल करना।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान को जिला स्तर तक ले जाएगी। मतदाता सूची में नाम कटने और जुड़ने से संबंधित शिकायतों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा तथा नागरिकों को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए जागरूक और संगठित किया जाएगा।
1 नवंबर को इंडिया गठबंधन की रैली और विशाल आमसभा
कांग्रेस ने एसआईआर के विरोध में 1 नवंबर को इंडिया गठबंधन की रैली और विशाल आमसभा आयोजित करने की घोषणा की। नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ी है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची को पारदर्शी बनाए बिना निष्पक्ष चुनाव की कल्पना नहीं की जा सकती।
प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, बागबाहरा जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर, शहर अध्यक्ष गुरमीत चावला, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर, अमरजीत चावला, महेन्द्र चंद्राकर, आलोक चंद्राकर, पूर्व नपाध्यक्ष राशि महिलांग, प्रभारी महामंत्री लक्ष्मण पटेल, समीम खान और गिरीश पटेल सहित कांग्रेस के अन्य नेता मौजूद रहे।
