पांच साल से गुहार बेअसर, आज भी पुराने भवन की न मरम्मत हुई, न नए स्कूल भवन मिला…!
भद्रसी के बच्चों की पढ़ाई दो पालियों में, खतरे के साये में शिक्षा; बुधवार तक जवाब नहीं मिला तो गुरुवार से स्कूल में तालाबंदी का ऐलान
महासमुंद। ग्राम भद्रसी के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भवन की जर्जर हालत सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पिछले करीब पांच साल से स्कूल भवन की समस्या को लेकर आवेदन-दर-आवेदन दिए जा रहे हैं, लेकिन न नया भवन मिला और न ही जर्जर भवन की स्थायी मरम्मत हो सकी। हालात यह हैं कि पहली से आठवीं तक के बच्चों को सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने के बजाय स्कूल को दो पालियों में संचालित करना पड़ रहा है। अब ग्रामीणों और शाला समिति ने साफ कर दिया है कि यदि बुधवार तक ठोस कार्रवाई या जवाब नहीं मिला तो गुरुवार से स्कूल में तालाबंदी कर आर-पार की लड़ाई शुरू की जाएगी।
ग्रामीणों के मुताबिक, जर्जर भवन से बच्चों को हटाकर मिडिल स्कूल परिसर में ही कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कक्षा पहली से पांचवीं तक सुबह 7 से 11 बजे और कक्षा छठवीं से आठवीं तक सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक पढ़ाई होती है। यानी एक ही परिसर में पूरे दिन बच्चों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद जर्जर स्कूल भवन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
छत से टपकता पानी, दीवारों में सीपेज; बिजली व्यवस्था पर भी खतरा
ग्रामीणों ने अधिकारियों को दिए आवेदन में स्कूल भवन की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि जर्जर छत से बारिश का पानी अंदर टपकता है। लगातार नमी के कारण दीवारों में सीपेज और कमजोरी की स्थिति बन रही है। छत और दीवारों से पानी बहने के कारण विद्युत व्यवस्था को लेकर भी खतरा बना रहता है। ग्रामीणों की आशंका है कि कमजोर छत अथवा भवन का कोई हिस्सा गिरने से कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
ग्रामीणों ने जर्जर छत को हटाकर नए छत निर्माण की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और पढ़ाई भी प्रभावित न हो।
आवेदन पर आवेदन, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ इंतजार
स्कूल भवन की स्थिति को लेकर ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि वे करीब पांच वर्षों से लगातार जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष समस्या उठा रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर आवेदन देने और समस्या की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने के बावजूद स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर भी सिस्टम की कार्रवाई कागजी प्रक्रिया और आश्वासन से आगे नहीं बढ़ पा रही है। सवाल यह भी है कि यदि भवन वास्तव में जर्जर है तो पांच वर्षों में उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया? और यदि भवन बच्चों के लिए असुरक्षित है तो उसके सुरक्षित विकल्प की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं की गई?
बुधवार तक जवाब नहीं तो गुरुवार से तालाबंदी
अब ग्रामीणों और शाला समिति ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बुधवार तक यदि समस्या के निराकरण को लेकर कोई ठोस जवाब या कार्रवाई नहीं होती है, तो गुरुवार से स्कूल में तालाबंदी की जाएगी। इसके साथ ही कलेक्टर, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह महज स्कूल भवन की मरम्मत का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। जर्जर भवन में बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इन अधिकारियों तक पहुंचा आवेदन
शाला समिति की पूर्व अध्यक्ष निर्मला बाई मिर्धा, शिवकुमार मिर्धा सहित शाला समिति के पदाधिकारियों, पालकों और ग्रामवासियों ने जर्जर छत का तत्काल निर्माण कराने की मांग की है। आवेदन की प्रतियां जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, विकासखंड शिक्षा अधिकारी बागबाहरा, जनपद पंचायत बागबाहरा और ग्राम पंचायत भद्रसी सहित संबंधित अधिकारियों को दी गई हैं।
अब देखना यह है कि पांच साल से लंबित इस समस्या पर जिम्मेदार विभाग एक और आवेदन का इंतजार करता है या बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बुधवार से पहले कोई ठोस कदम उठाता है।
