जनसहयोग से बदली गांव की तस्वीर, 15 लाख में बन रहा 20 हजार वर्गफीट का पक्का गौठान
सरकारी बजट का इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा, अब तक 6.50 लाख से अधिक खर्च; कीचड़ से मिली गोवंशों को राहत
महासमुंद। सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय यदि ग्रामीण स्वयं पहल करें तो गांव की बड़ी समस्याओं का समाधान जनसहयोग से भी संभव है। ग्राम लाफिन कला के ग्रामीणों ने इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए करीब 15 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल वाले गौठान को कांक्रीट करने का काम शुरू किया है। ग्राम विकास समिति की पहल पर शुरू हुए इस कार्य में अब तक 6.50 लाख रुपए से अधिक खर्च कर कांक्रीट ढलाई का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा चुका है।
गांव का गौठान लंबे समय से खुले मैदान में संचालित हो रहा था। बारिश के दिनों में यहां पानी और कीचड़ जमा होने से गोवंशों को काफी परेशानी होती थी। स्थिति यह हो जाती थी कि मवेशियों के बैठने के लिए सूखी जगह तक नहीं बचती थी। गोवंशों की परेशानी को देखते हुए ग्राम विकास समिति ने बैठक कर गौठान के पक्कीकरण का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने भी इस पहल पर सहमति जताई और समिति की राशि से कांक्रीट ढलाई का काम शुरू किया गया।
बारिश में कीचड़ से मिली राहत
गौठान का फर्श कांक्रीट होने से बारिश के दौरान जलभराव और कीचड़ की समस्या कम हुई है। समतल फर्श के कारण गोबर और गौमूत्र की सफाई एवं संग्रहण भी पहले की तुलना में आसान हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार साफ-सुथरा और सूखा परिसर होने से गोवंशों को बैठने तथा आराम करने के लिए बेहतर जगह मिल रही है।
गोबर प्रबंधन भी हुआ आसान
ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष रामकुमार साहू ने बताया कि बरसात में कीचड़ के कारण गौठान की सफाई करना बेहद मुश्किल हो जाता था। गोबर भी कीचड़ में मिल जाता था, जिससे उसे उठाने और व्यवस्थित करने में परेशानी होती थी। कांक्रीट फर्श बनने के बाद सफाई के साथ गोबर के संग्रहण और जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया भी सुगम होगी।
पहले भी जनसहयोग से जुटा चुके हैं 50 लाख
लाफिन कला के ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से गांव के विकास की दिशा में पहले भी मिसाल कायम की है। ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले करीब 50 लाख रुपए चंदे के रूप में जुटाकर श्रीराम जानकी मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया। इसके अलावा गांव के बीच स्थित तालाब के मध्य शिवलिंग के आकार का आकर्षक शिव मंदिर भी बनाया गया है। ग्रामीणों की इसी सामूहिक भावना से अब गौठान को पक्का करने का काम किया जा रहा है।
