36 ग्राम पंचायतों में टीएनसी लागू करने की तैयारी का आरोप, पूर्व पार्षद पंकज ने उठाए सवाल

07 अगस्त को प्रस्तावित साडा बैठक में निर्णय की आशंका, ग्रामीणों से शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने की अपील
महासमुंद। सिरपुर विकास प्राधिकरण (साडा) के माध्यम से महासमुंद विधानसभा क्षेत्र की 36 ग्राम पंचायतों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) लागू करने की तैयारी किए जाने का आरोप लगाते हुए पूर्व पार्षद पंकज साहू ने सरकार पर ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी नियोजन व्यवस्था थोपने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों को इस दायरे में लाने की बात कही जा रही है, वे पूर्णतः ग्रामीण क्षेत्र हैं और वहां किसी प्रकार का शहरी क्षेत्र (टाउन एरिया) नहीं है।
पंकज साहू ने दावा किया कि 07 अगस्त 2026 को प्रस्तावित साडा की बैठक में इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। उनका कहना है कि यदि इन ग्राम पंचायतों में टीएनसी लागू किया जाता है तो ग्रामीणों को मकान निर्माण, दुकान निर्माण, भूमि विभाजन, भूमि उपयोग परिवर्तन सहित अन्य सामान्य कार्यों के लिए भी साडा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य हो सकता है। इससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ने के साथ ही विकास कार्यों की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।
उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में इस व्यवस्था का उपयोग पर्यटन क्षेत्र के विस्तार तथा ग्रामीण भूमि के उपयोग में बड़े स्तर पर बदलाव के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े ऐसे किसी भी निर्णय से पहले ग्राम सभाओं और स्थानीय नागरिकों की सहमति लेना आवश्यक है तथा उनकी राय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पूर्व पार्षद ने इस मुद्दे पर महासमुंद विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर उनकी चुप्पी जनता के बीच कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने विधायक से सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने और 36 ग्राम पंचायतों के हितों की रक्षा के लिए आगे आने का आग्रह किया।
पंकज साहू ने साडा क्षेत्र की सभी 36 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, पंचों, जनपद एवं जिला पंचायत सदस्यों तथा ग्रामीणों से अपील की है कि वे 07 अगस्त को प्रस्तावित बैठक में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर ग्रामीण हितों के प्रतिकूल किसी भी प्रस्ताव का लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि पंचायतों के अधिकार, किसानों की भूमि और स्थानीय स्वशासन की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर ग्रामीणों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। सरकार को पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए ग्राम सभाओं की राय को सर्वोच्च महत्व देना चाहिए।

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