पूर्व घोर नक्सल प्रभावित पीड़ियाकोट में पहली बार हुआ संस्थागत प्रसव
मायका सेंटर डुंगा में दो महिलाओं ने सुरक्षित रूप से बच्चों को दिया जन्म, जच्चा-बच्चा सभी स्वस्थ
नारायणपुर, 05 अगस्त 2026// अबूझमाड़ के दुर्गम एवं पूर्व में घोर नक्सल प्रभावित रहे ग्राम पीड़ियाकोट में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। गांव में पहली बार दो गर्भवती महिलाओं का सफलतापूर्वक संस्थागत प्रसव कराया गया। यह उपलब्धि दुर्गम क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्राम पीड़ियाकोट निवासी दशरी, पति बुधराम, आयु 38 वर्ष एवं सुधरी, पति मुरा, आयु 35 वर्ष को स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा सुरक्षित मातृत्व एवं संस्थागत प्रसव के संबंध में निरंतर परामर्श दिया गया। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दोनों महिलाओं एवं उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के महत्व तथा मायका सेंटर में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी गई।
काउंसलिंग के पश्चात दोनों गर्भवती महिलाओं को दुर्गम मार्गों से बाइक एम्बुलेंस के माध्यम से मायका सेंटर डुंगा पहुंचाया गया। मायका सेंटर में दोनों महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक देखभाल एवं सतत निगरानी की गई। 26 जुलाई 2026 को दशरी ने 2.480 किलोग्राम वजन के एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया, जबकि सुधरी ने 2.400 किलोग्राम वजन की एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। वर्तमान में दोनों माताएं एवं दोनों नवजात स्वस्थ हैं तथा स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल की जा रही है।
पूर्व में घोर नक्सल प्रभावित रहे पीड़ियाकोट जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच सीमित रहने के कारण गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य अमले की सतत काउंसलिंग, नियमित संपर्क एवं बाइक एम्बुलेंस की सुविधा ने दोनों गर्भवती महिलाओं को समय रहते स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मायका सेंटर की पहल से दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल, सुरक्षित ठहराव, नियमित स्वास्थ्य जांच, संस्थागत प्रसव तथा प्रसव उपरांत आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पीड़ियाकोट में पहली बार संस्थागत प्रसव का सफलतापूर्वक होना स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच और समुदाय में संस्थागत प्रसव के प्रति बढ़ते विश्वास का सशक्त उदाहरण है।
