बागबहरा में गूंजी ग़ज़लों की महफ़िल, शायरों ने बांधा समां
‘ग़ज़लों की गूंज’ मुशायरे में जिले के नामचीन शायरों ने पेश की बेहतरीन रचनाएं, श्रोताओं ने तालियों से किया स्वागत
महासमुंद। महासमुंद जिला साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। यहां कविता, गीत, ग़ज़ल और अन्य साहित्यिक विधाओं के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहे हैं, लेकिन केवल ग़ज़लों को समर्पित आयोजन विरले ही देखने को मिलते हैं। इसी कड़ी में 5 जुलाई को बागबहरा के लालपुर स्थित साहू समाज के सामाजिक भवन में साहित्य संदेश समिति एवं लोक कला संरक्षण समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘ग़ज़लों की गूंज’ शीर्षक से भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार स्वराज्य ‘करुण’, अशोक शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुशायरे का प्रभावशाली संचालन पिथौरा के शायर प्रवीण ‘प्रवाह’ ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत बागबहरा के वरिष्ठ शायर हबीब समर की ग़ज़लों से हुई। उनके अशआर “जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता, उस घर में फरिश्ता भी मेहमान नहीं होता…” को श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसके बाद महासमुंद के युवा शायर श्लेश चंद्राकर ने अपनी नई शैली की प्रभावशाली ग़ज़लों से खूब दाद बटोरी। वहीं शायर सलीम कुरैशी ने तरन्नुम और तहद दोनों अंदाज़ में ग़ज़लें प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
पिथौरा के वरिष्ठ रचनाकार स्वराज्य ‘करुण’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों और व्यवस्था की सच्चाइयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।
संचालक प्रवीण ‘प्रवाह’ ने भी अपनी बारी में समसामयिक विषयों पर आधारित ग़ज़लों से खूब वाहवाही लूटी। उनके व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े शेरों ने विशेष आकर्षण पैदा किया।
राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित शायर अशोक शर्मा ने अपनी नई और चर्चित ग़ज़लों से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने हालिया नकटी गांव की घटना पर आधारित अपनी सामयिक रचना प्रस्तुत कर सामाजिक संवेदनाओं को भी स्वर दिया, जिसे श्रोताओं ने गंभीरता से सुना और सराहा।
मुशायरे के समापन के बाद राजू कोमाखान, निर्वेश दीक्षित, धनराज साहू एवं अनुराग द्विवेदी ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के अंत में नगर पंचायत बागबहरा के उपाध्यक्ष देवेश साहू ने आभार व्यक्त किया। आयोजन की सफलता में चेतन महाराज, जनक साहू, जसवंत भारती, सी.पी. तिवारी, लायक राम, पांडे जी एवं अविनाश जी सहित अनेक साहित्यप्रेमियों का सराहनीय सहयोग रहा।
ग़ज़लों की इस यादगार शाम ने यह साबित कर दिया कि महासमुंद जिले में साहित्य और शायरी की समृद्ध परंपरा आज भी पूरी जीवंतता के साथ आगे बढ़ रही है। बागबहरा में आयोजित यह मुशायरा साहित्य प्रेमियों के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगा।
