एलपीजी घोटाला का मास्टरमाइंड फूड अफसर अजय यादव तीन दिन के रिमांड पर
रिश्तेदारों और करीबियों तक पहुंची जांच
92 टन गैस चोरी और 80 लाख के लेन-देन की जांच तेज, अब तक बड़ी रकम बरामद नहीं
महासमुंद। जिले के बहुचर्चित 1.5 करोड़ रुपये के एलपीजी गैस घोटाले में पुलिस जांच लगातार गहराती जा रही है। मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को शनिवार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
अजय यादव पर शासकीय संपत्ति के गबन की साजिश रचने, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इसके बावजूद गिरफ्तारी के तीन दिन बाद भी राज्य शासन द्वारा उनका निलंबन आदेश जारी नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
वहीं दूसरी ओर गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और व्यापारी मनीष चौधरी को न्यायालय ने जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।
चोरी की गैस और पैसों का हिसाब तलाश रही पुलिस
80 लाख में से सिर्फ 5 लाख का सामान और 8 हजार नकद बरामद
पुलिस सूत्रों के अनुसार चोरी कर बेची गई करीब 92 टन गैस के एवज में लगभग 80 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था। जांच में सामने आया है कि इस रकम में से लगभग 50 लाख रुपये अजय यादव और करीब 20 लाख रुपये पंकज चंद्राकर और 10 लाख मनीष चौधरी को मिले थे।
हालांकि अब तक पुलिस इन दोनों आरोपियों से रकम बरामद नहीं कर पाई है। पुलिस को सिर्फ रायपुर के व्यापारी मनीष चौधरी के सोनू ट्रेडर्स से 5 लाख 11 हजार 900 रुपये के होम अप्लायंसेज और 8 हजार रुपये नकद मिले हैं। यही वजह है कि पुलिस लगातार अजय यादव से पूछताछ कर पैसों के लेन-देन और निवेश की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पुलिस की रेड
घरों से नहीं मिला कैश, लेकिन अहम दस्तावेज हाथ लगे
जांच के दौरान पुलिस ने अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित घरों पर छापेमारी की। हालांकि छापे में नकदी बरामद नहीं हुई, लेकिन पुलिस को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। दस्तावेजों के आधार पर पुलिस अब संपत्तियों और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि पंकज चंद्राकर ने गैस चोरी से कमाए गए लगभग 20 लाख रुपये गौरव गैस एजेंसी के व्यापार को बढ़ाने में लगाए थे।
रिश्तेदारों और करीबियों तक पहुंची जांच
संपत्तियों और निवेश की खंगाली जा रही जानकारी
पुलिस अब दिसंबर 2025 से लेकर अब तक अजय यादव और पंकज चंद्राकर के करीबी लोगों, परिचितों और रिश्तेदारों द्वारा खरीदी गई संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि घोटाले की रकम को प्रॉपर्टी और अन्य निवेशों में खपाया गया हो सकता है। इसी वजह से पुलिस का फोकस अब सिर्फ मुख्य आरोपियों तक सीमित नहीं रह गया है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस कभी भी गौरव गैस एजेंसी और खाद्य विभाग कार्यालय में दबिश दे सकती है। साथ ही गौरव गैस एजेंसी से जब्ती की कार्रवाई भी की जा सकती है।
सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी बने अहम सबूत
सिंघोड़ा से आरंग तक की गतिविधियां जांच के घेरे में
मामले में पुलिस को कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी मिले हैं। जांच के दौरान पुलिस ने 26 मार्च को सिंघोड़ा थाना परिसर में खड़े गैस कैप्सूल को देखने पहुंचे अजय यादव और पंकज चंद्राकर का सीसीटीवी फुटेज जब्त किया है। इसके अलावा आरंग स्थित नेशनल हाईवे किनारे एक ढाबे में देर रात अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी के बीच हुई बैठक का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के हाथ लगा है। सुपुर्दगी प्रक्रिया के दौरान खाद्य विभाग के अधिकारियों और पंकज चंद्राकर की मौजूदगी में बनाई गई वीडियोग्राफी भी जांच में अहम भूमिका निभा रही है।
6 गैस कैप्सूल की जिम्मेदारी आखिरकार खाद्य विभाग को सौंपी गई
पुलिस पहले IOC से 6 गैस कैप्सूल को सुपुर्द करना चाहती थी, लेकिन सिंघोड़ा थाने में अपराध दर्ज होने के कारण IOC ने उन्हें अपनी कस्टडी में रखने से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कलेक्टर को पत्र लिखकर 6 गैस कैप्सूल को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने इन गैस कैप्सूल की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को सौंप दी।
रायपुर फूड विभाग को सौंपे जा रहे जब्त वाहन और सिलेंडर
पुलिस ने अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल से जब्त गैस कैप्सूल, बुलेट टैंक और भरे हुए सिलेंडरों को रायपुर खाद्य विभाग को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की गैस का नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
निलंबन नहीं होने पर उठ रहे सवाल
एक ओर पुलिस ने खाद्य अधिकारी अजय यादव को गंभीर आर्थिक अपराधों में गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है, वहीं दूसरी ओर अब तक उनका निलंबन नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि इतने बड़े आर्थिक घोटाले में गिरफ्तारी के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। पुलिस की आगे की जांच और पूछताछ से आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
