बालवाड़ी शिक्षकों को तीन चरणों में दिया गया प्रशिक्षण
महासमुंद। जिले के समस्त बालवाड़ी शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में दो दिवसीय ऑनलाइन तथा तीन दिवसीय ऑफलाइन सत्र शामिल हैं, जिन्हें तीन चरणों में सम्पन्न किया जाएगा । इसी क्रम में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में प्रथम चरण के अंतर्गत 16-17 फरवरी को ऑनलाइन प्रशिक्षण तथा 5 से 7 फरवरी तक तीन दिवसीय आमने-सामने (फेस-टू-फेस) प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के अंतिम दिवस आयोजित समापन समारोह में प्राचार्य अरुण प्रधान, उप-प्राचार्य श्रीमती उमादेवी शर्मा, सहायक प्राध्यापक एवं बालवाड़ी प्रशिक्षण प्रभारी राजेश चंद्राकर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बम्हनी के प्राचार्य चमन चंद्राकर उपस्थित रहे। प्राचार्य अरुण प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत बालवाड़ी के मार्गदर्शी सिद्धांतों और फाउंडेशनल पेडागॉजी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बालवाड़ी स्तर पर बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास उनके जीवन की मजबूत नींव तैयार करता है और उन्हें सार्थक कार्यों के लिए सक्षम बनाता है। नोडल अधिकारी एवं उप-प्राचार्य श्रीमती उमादेवी शर्मा ने प्रशिक्षण की आवश्यकता और महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को अनुकूल वातावरण प्रदान कर उनकी बुनियादी दक्षताओं का विकास करना बालवाड़ी का मुख्य उद्देश्य है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक विद्यालयों में बालवाड़ी का क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्रभारी राजेश चंद्राकर ने बताया कि यह प्रशिक्षण उच्च कार्यालय से प्राप्त मॉड्यूल के आधार पर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बालवाड़ी संचालन का प्रमुख उद्देश्य बच्चों की भावनाओं को समझना और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे फाउंडेशनल स्तर की शैक्षिक संरचना के अनुरूप विकसित हो सकें। समापन समारोह में प्राचार्य चमन चंद्राकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए और प्रशिक्षण को शिक्षकों के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। प्रशिक्षण के तकनीकी सहयोग तथा उद्घाटन-समापन समारोह का संचालन ईश्वर चंद्राकर, शिक्षक एवं एजुसेट प्रभारी ने किया। प्रशिक्षण के दौरान डीआरजी सदस्यों श्रीमती झरना साहू, श्रीमती खेमिन साहू, श्रीमती गीता साहू और श्रीमती सीमा यादव ने एनईपी-2020, एनसीएफ-एफएस-2022, ईसीसीई का महत्व, अधिगम शैली की विविधता, बच्चों के विकास के आयाम, स्कूल रेडिनेस, पालकों की सहभागिता, दैनिक कार्ययोजना, थीम-आधारित पाठ्यक्रम, जेंडर संवेदनशीलता तथा बालवाड़ी गतिविधियों जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक के. सिंह, श्रीमती सुलभा द्विवेदी, एम.डी. वर्मा, व्याख्याता संतोष साहू, टेकराम सेन, श्रीमती सुमन दीवान, किरण कन्नौजे, श्रीमती दुर्गा सिन्हा, श्रीमती तिलोतमा प्रधान, श्रीमती लक्ष्मी सिन्हा, प्रशिक्षण प्रभारी लिपिक सुषेण दीवान, तरुण चंद्राकर सहित समस्त अकादमिक एवं कार्यालयीन स्टाफ का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
