नया टूरिस्ट स्पॉट बना मेंडोली, पीले फुलों की छटा बिखेरते राम के खेत आकर्षण का केंद्र

दंतेवाड़ा, 28 नवंबर 2025। जिले की प्राकृतिक सुंदरता मानसून एवं शीतऋतु में हमेशा से ही दर्शनीय रहती है। मानसून तो बीत चुका है परन्तु अब इस ठंड के मौसम में भी जिले का प्राकृतिक सौंदर्य प्रकृति प्रेमियों को लुभाने में सक्षम है। जिले के ग्रामीण परिवेश में जाए तो दूर-दूर तक धान के पके फसलों से लैस खेत खलिहान या फिर फसल कटाई में व्यस्त ग्रामीणजनों की टोलियां या फिर हरे भरे जंगलों के बीच दृष्टिगोचर छोटे बड़े नदी नालाओं में बहती स्वच्छ जलधाराएं सभी का मनमोह लेती है। कुल मिलाकर इन सभी का सम्मिलित परिदृश्य शीत ऋतु को रोचक एवं आनंददायक बनाने के लिए पर्याप्त है। इन सभी के बीच विकासखंड दंतेवाड़ा के ग्राम मेंडोली में रामतिल की खेती इस प्राकृतिक सौंदर्य को चार चांद लगा रही है। जिले से 20 किलोमीटर दूर ग्राम मेंडोली पहुंचने पर सड़क दोनों ओर रामतिल फसल के लहलहाते पीले फूलों से ढके खेत देखकर ऐसा लगता है मानो धरती ने पीला दुशाला ओढ़ रखा हो। फोटोग्राफी प्रेमियों और प्रकृति को निहारने वालों के लिए ये सभी खेत आकर्षण का नया केंद्र बन गया है। सुबह की रोशनी और शाम की हल्की धूप में रामतिल के पीताभ फूलों की सुषमा के बीच दृश्य इतना मनमोहक दिखता है कि हर आगंतुक इसे कैमरे में कैद किए बिना आगे नहीं बढ़ता। रामतिल की खेती कर रहे मेंडोली ग्राम के किसानों में से एक श्री मंगडू कश्यप का कहना है कि उन्होंने पारंपरिक फसलों के स्थान पर पहली बार रामतिल जैसे वाणिज्यिक वैकल्पिक फसल को चुनने का निर्णय लिया है। वे कहते है कि इस फसल को तैयार करने में उन्हें बहुत कम पानी की आवश्यकता हुई। और कम मेहनत और लागत के साथ उनकी फसल तैयार हो गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो रामतिल की फसल बाजार मूल्य अन्य फसलों की तुलना में अधिक है। जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

ज्ञातव्य है कि कृषि विभाग और जिला प्रशासन द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ चयनित कृषकों को बीज की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है, जिसके लिए सीड बैंक की विशेष व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर और स्थानीय स्तर पर ही मिल सके। नेशनल ऑयलसीड मिशन के अंतर्गत दंतेवाड़ा विकासखंड में कावड़गांव को क्लस्टर बनाकर तिलहन उत्पादन का विस्तार किया गया है। इसी कार्यक्रम के तहत मंडोली सहित चितालुर, पोंदूंम, जारम, मेटापाल, कावड़गांव और डुमाम जैसे गांवों के किसानों द्वारा 1 से 5 एकड़ तक रामतिल की बुवाई की गई है। निर्धारित लक्ष्य अनुरूप जिले के 100 हेक्टेयर क्षेत्र में 150 किसानों को रामतिल की बुआई के लिए चिन्हांकित किया गया था। और कृषि विभाग द्वारा फसल की मॉनिटरिंग करने पर पाया गया कि सभी गांवों में फसल की स्थिति अत्यंत उत्तम है। इससे भविष्य में रामतिल का रकबा बढ़ाए जाने की संभावना को बल मिला है इसके अलावा इस खेती को लेकर किसानों में उत्साह और आत्मविश्वास देखने को भी मिला है। बहरहाल रामतिल के इन लहलहाते खेतों ने जिले में तिलहन की खेती की संभावनाओं को न केवल बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण पर्यटन का दरवाजा भी खोल दिया है। बाहरी आगंतुकों की बढ़ती आवाजाही से गांव में नए अवसर विकसित हो रहे हैं और युवाओं को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता की संभावनाएँ नजर आने लगी हैं। प्रकृति के सौंदर्य संरक्षण और खेती की विविधता को बढ़ावा देने की यह पहल ग्रामीण प्रगति का नया अध्याय लिख रही है। मेंडोली की यह सफलता कहानी अब पूरे दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। प्रशासन एवं कृषि विभाग के सतत सहयोग से यह उम्मीद और मजबूत हुई है कि आने वाले वर्षों में रामतिल तथा अन्य तिलहन फसलों का रकबा तेजी से बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। इसके साथ ही फील्ड ऑफिसर श्री सुरेश कुमार नाग तथा लोकल रिसोर्स पर्सन (एल.आर.पी.) श्री दिलीप मरकाम, द्वारा समय-समय पर किसानों को मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्रदान भी किया जा रहा है।