मनरेगा बचाओ संग्राम: कांग्रेसियों ने धक्का-मुक्की कर तोड़े बैरिकेडिंग
मनरेगा कानून में बदलाव से छग में फिर से वही पलायन का दौर शुरू हो जाएगा: विधायक उमेश पटेल
महासमुंद। मनरेगा बचाओ संग्राम तहत आज जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कलेक्टर घेरा किया गया। इस दौरान कांग्रेसियों ने चार सुरक्षा घेरे में से एक लेयर को तोड़ने में कामयाब हुए। इस दौरान एक मानवीय पहलू भी देखने को मिला। भीड़ द्वारा बैरिकेडिंग तोड़ने के दौरान धक्का-मुक्की में दो सिपाही गिर गए और युकां अध्यक्ष ने दोनों सिपाही को कुचलें जाने से बचा लिया। इसके बाद नेताओं ने संशोधित मनरेगा कानून को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस राजीव भवन में मनरेगा बचाओ संग्राम और कलेक्टर घेराव कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस भवन में आयोजित आमसभा में मनरेगा बचाओ संग्राम के राज्य प्रभारी खरसिया विधायक उमेश पटेल, सह राज्य प्रभारी विजय जांगिड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष व विधायक द्वारिकाधीश यादव, सरायपाली विधायक चातुरी नंद, नगर पालिका अध्यक्ष निखिलकांत साहू, बागबाहरा जनपद अध्यक्ष केशव चंद्राकर, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, पूर्व जिलाध्यक्ष रश्मि चंद्राकर, जीव-जंतु उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर, ब्लॉक अध्यक्ष मोहित ध्रुव मंच पर मौजूद रहे। इस दौरान
विधायक उमेश पटेल ने मंच से कहा कि गरीब मजदूरों के लिए यूपीए के मनमोहन सिंह सरकार में मनरेगा कानून बनाया गया, जिसमें 101 दिन की रोजगार की गारंटी दिया गया था। लेकिन जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है मनरेगा के खिलाफ बोलता रहा है। यही नही लगातार 11 साल से मनरेगा के विरोध में हैं। उन्होंने कहा मोदी की सरकार किसान विरोधी सरकार है। यह वही सरकार है जिसने किसानों के लिए तीन काला कानून लाई थी। इस देश की किसानों की एक जुटता के कारण ही तीनों काला कानून को वापस लेने पर मजबूर किया था। पहले मनरेगा के कानून में रोजगार की गारंटी है लेकिन अभी लाया गया कानून में गारंटी को खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के 100 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार को 40 प्रतिशत और 60 प्रतिशत केंद्र द्वारा दिए जाने वाला कानून लाया है। अगर राज्य सरकार राशि नही दे पाने की स्थिति में मनरेगा पूरी तरह से बंद हो जाएगा, जिससे गरीबों और मजदूरों को मिलने वाला रोजगार पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोपा लगाते हुए कहा कि मनरेगा कानून में जो बदलाव किया गया है , छत्तीसगढ़ में फिर से वही पलायन का दौर शुरू हो जाएगा, जो एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है। ताकि इसक फायदा उद्योगपतियों को मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय में बैठे 11 चूहे ने छत्तीसगढ़ के करोड़ का धान खा गए। उन्होंने स्मार्ट मीटर और लगातार बिजली बिल में वृद्धि को लेकर सरकार को घेरा। सभा के बाद कांग्रेसियों ने रैली निकालकर कलेक्टोरेट पहुंचे। कांग्रेसी कार्यकर्ता, नेताओं और पुलिस के बीच जमकर शक्ति प्रदर्शन हुआ। कार्यकर्ताओं ने जमकर धक्का-मुक्की की और चार सुरक्षा घेरे में पहले ही घेरे को तोड़ दिया। बैरिकेडिंग तोड़ने और धक्का-मुक्की के दौरान बड़ा हादसा होने से टल गया। कार्यकर्ताओं द्वारा बैरिकेडिंग तोड़ने के दौरान दो सिपाही नीचे गिर गए। इस बीच युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष अध्यक्ष अमन चंद्राकर नीचे गिर पड़े सिपाही के सामने खड़े हो गए और भीड़ से कुचले जाने से बचा लिया। दोनों सिपाही को उठाया। नेताओं और कार्यकर्ता दूसरे सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश करता रहा लेकिन कामयाब नही हुए। प्रशासन की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया गया, जिनमें खरसिया विधायक उमेश पटेल, सह प्रभारी विजय जांगिड़, जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव, सरायपाली विधायक चातुरी नंद समेत अन्य पदाधिकारीगण ने एसडीएम अक्षा गुप्ता को मनरेगा के पुराने कानून की बहाली और नये कानून को निरस्त करते हुए ज्ञापन सौंपा। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने चार लेयर में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया था। चारों स्थान पर 2 एडिशनल एसपी, 4 डीएसपी, 14 टीआई और 230 जवान को तैनात किया गया था।
