गणेशोत्सव की तैयारी पूरी, आज से पंडालों में विराजेंगे बप्पा

गणेश जी की प्रतिमा के लिए हाईस्कूल मैदान की दुकानों में भक्तों की रही भीड़
महासमुंद। आज से आगामी दस दिनों तक शहर सहित ग्रामीण अंचलों में गणेश उत्सव की धूम रहेगी। हाईस्कूल में लगी गणेश प्रतिमाओं की अस्थाई दुकानों से घरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित करने प्रतिमाएं ले जाने का सिलसिला जारी रहा। वहीं कुम्हारपारा से बड़ी प्रतिमाएँ ढोल-नगाड़ों की धुन पर सार्वजनिक पंडालों की ओर रवाना हुए।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गणेश चतुर्थी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। शहर के हाईस्कूल मैदान में प्रतिमा बिक्री के लिए लगी-अस्थाई दुकानों में बप्पा के भक्त प्रतिमा के लिए पहुंचे। पंडालों में प्रतिमा पसंद करने भीड़ लगी लगी रहीं है। यहां लगी दुकानों में दो सौ रुपए से 2 हजार रुपए तक की छोटी-बड़ी प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। कई बड़ी समितियों की प्रतिमाएं मूर्तिकारों के घरों में तैयार हो चुकी है। इधर, जिस हिसाब से दुकानों में ग्राहक प्रतिमा देखने और खरीदने पहुंच रहे हैं उसे देखते हुए मूर्तिकारों को पिछले साल की तुलना में इस साल अच्छे कारोबार की उम्मीद है। नगर के गंजपारा, बाजार वार्ड, शंकर नगर, अंबेडकर चौक, गांधी चौक, लोहिया चौक, एफसीआई रोड पंजाबी पारा, श्री राम मंदिर, महामाया मंदिर, राम टॉकिज पारा, ईडब्लूएस कॉलोनी हाऊसिंग बोर्ड सहित विभिन्न स्थानों पर आर्कषक पंडाल की तैयारी हो चुकी है। इनमें से कई समितियां रायपुर से लाकर प्रतिमा विराजित करेंगी। भले ही सार्वजनिक पंडालों में शाम को गणेश जी की प्रतिमाएँ स्थापित होंगी पर घरों में बुधवार सुबह से ही गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
मूर्तिकारों ने कहा-सब सामान हो गया महंगा
गणेश चतुर्थी को लेकर शहर के चौक-चौराहों और गली-मोहल्लों से लेकर ग्रामीण अंचलों में तैयारियां हो गई हैं। इस वर्ष गणेश उत्सव 27 अगस्त से शुरू होगा और प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला 6 सितंबर से शुरू हो जाएगा। पिछले साल की अपेक्षा इस बार भी समिति के सदस्यों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है। मूर्तिकारों का कहना है कि निर्माण के सभी सामान महंगे हो गए हैं। जो मिट्टी पिछले साल 2 हजार प्रति ट्रैक्टर ट्रॉली थी वह बढ़कर ढाई हजार तक हो गई है। पुट्टी, रंग के दाम में भी बढ़ोत्तरी हो गई है। बता दें कि शहर के कुम्हारपारा में सबसे अधिक गणेश व दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है। यहां से प्रतिमाएं शहर सहित ग्रामीण अंचलों और अन्य जिलों में भी भेजी जाती हैं। इस साल यहां 200 से लेकर 50 हजार तक की प्रतिमाओं का निर्माण हुआ है।