बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार, उचित कार्रवाई की कमी भी बड़ा कारण: एकता लंगेह

‘बुजुर्ग आबादी किसी भी समाज के लिए एक मूल्यवान संपत्ति’
महासमुंद। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर समाजसेवी डॉ एकता लंगेह के मार्गदर्शन में आशियाना वृद्धाश्रम में वृद्धजनों संग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान डाॅ. एकता ने कहा कि बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार एकल या बार-बार होने वाली घटना या उचित कार्रवाई की कमी के कारण किसी भी रिश्ते में घटित हो सकती है। कई परिवारों में बुजुर्गों पर बेतहाशा अत्याचार भी होता है और वक्त के साथ सब कुछ ठीक हो जाने की उम्मीद के साथ बुजुर्ग चुप रहते हैं। बहुत बार ऐसा होता है कि किसी बात का विरोध आदि करने पर उन्हें घर से निकाल दिया जाता है। बहुत से बुजुर्गों के साथ मारपीट तक की घटना होती है और आंखों में आंसू लेकर बुजुर्ग आसरा ढूंढते हैं। ऐसे में आशियाना की तरह का कोई आसरा मिल जाता है तो बुजुर्ग कुछ दिन और जी लेते हैं। यह हमारे संस्कार के खिलाफ है। होना तो यह चाहिए कि वृद्धाश्रम की जरूरत न पड़े।
कार्यक्रम में विपिन मोहंती ने कहा कि जीवन प्रत्याशा में संयुक्त परिवार संरचना में गिरावट और सामाजिक विघटन के संयोजन ने वृद्ध व्यक्तियों को अकेलेपन और सावधानी का अनुभव कराया है। यह अनुशंसा की जाती है कि वृद्ध लोग शारीरिक गतिविधियों में शामिल होकर पौष्टिक आहार का सेवन करने और तंबाकू, शराब और अन्य हानिकारक पदार्थों से परहेज करने स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें।
इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि बुजुर्ग आबादी किसी भी समाज के लिए एक मूल्यवान संपत्ति है। उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आती है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 10.4 करोड़ लोग रहते हैं जो कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग ने बुजुर्गों को मिलने वाली शासन की विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया। कार्यक्रम के पश्चात अतिथियों ने बुजुर्गों को कपड़े और आवश्यक सामग्री भेंट की। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद सभी ने बुजुर्गो संग भोजन किया। कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्था के सदस्य, आशियाना वृद्धा आश्रम व घरौंदा संस्था के समस्त सदस्य देखरेख में जुटी महिलाएं उपस्थित थीं।

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