वृद्धाश्रम में विधिक जागरुकता शिविर

महासमुंद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद के तत्वावधान में सरल कानूनी शिक्षा के माध्यम से तथा जनजागरुकता लाने के उद्देश्य से शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। प्रबंध कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद के अधिकार मित्र हरिचंद साहू ने बताया कि दलदली रोड स्थित आशियाना वृद्धाश्रम में विधिक जागरुकता थीम पर आधारित शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में वरिष्ठजनों के लिए उनके अधिकारों तथा माता-पिता भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। न्यायिक मजिस्ट्रेट गीताजंलि कश्यप ने बताया कि जिनकी आयु (60) वर्ष अथवा उससे ज्यादा है, जो स्वयं आय अर्जित करने में असमर्थ हैं अथवा स्वामित्वाधीन संपत्ति में से स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, ऐसे व्यक्ति उक्त अधिनियम अंतर्गत भरण पोषण करने के लिए आवेदन करने के हकदार हैं। वे भरण पोषण का आवेदन वरिष्ठ नागरिक, माता पिता अपने क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष भी पेश कर सकते हैं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय द्वारा अधिकतम 10 हजार रूपए तक प्रतिमाह का भरण पोषण खर्च वरिष्ठ नागरिक, माता-पिता को दिलाया जा सकता है। वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता उक्त अधिनियम के अंतर्गत भरण पोषण का आवेदन पेश कर सकते हैं अथवा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के प्रावधान के अंतर्गत न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी के न्यायालय में भी आवेदन पेश करने के लिए सक्षम हैं। अधिनियम में इस बात का भी प्रावधान है कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा सहायता के लिए यथासंभव प्रयास करेगी और उन्हें नि:शुल्क चिकित्सा की सुविधा प्रदत्त कराई जाएगी। आश्रम में दी जा रही सुविधा जैसे भोजन, पानी, बिजली, स्वच्छता अथवा मनोरंजन के साधन, स्वास्थय सुविधा पर भी चर्चा की। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर द्वारा चलाए जा रहे अभियान करूणा के बारे में बताया।