15 अगस्त से फटा तिरंगा लटकता रहा, जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ी

झलप के ग्रामीण विकास समिति भवन पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान! नियम कहते हैं- क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त तिरंगा प्रदर्शित नहीं किया जा सकता, उल्लंघन पर तीन साल तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान
महासमुंद। राष्ट्रीय ध्वज देश के गौरव, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। इसके सम्मान और प्रदर्शन के लिए बाकायदा फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 और प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हाॅनर एक्ट, 1971 में प्रावधान किए गए हैं। इसके बावजूद झलप में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्रामीण विकास समिति भवन की छत की रेलिंग पर स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को लगाया गया तिरंगा अब फटकर डंडे से नीचे लटक रहा है। हैरानी की बात यह है कि कई दिनों से क्षतिग्रस्त हालत में लगे इस राष्ट्रीय ध्वज पर जिम्मेदारों का ध्यान तक नहीं गया।
मौके की स्थिति देखकर सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस तिरंगे के सम्मान में देशभर में अभियान चलाए जाते हैं, उसी तिरंगे की देखरेख को लेकर जिम्मेदार इतने बेपरवाह कैसे हो सकते हैं? तिरंगा फट चुका है और अस्त-व्यस्त हालत में लटक रहा है, फिर भी उसे हटाने या सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखने की पहल नहीं की गई।
नियम साफ कहते हैं- फटा या अस्त-व्यस्त तिरंगा नहीं लगाया जा सकता
गृह मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन फेलेग कोड ऑफ इंडिया, 2002 तथा
प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हाॅनर एक्ट,
, 1971 के प्रावधानों के तहत होता है। फ्लैग कोड में स्पष्ट है कि क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही तिरंगे को सम्मान और गरिमा के अनुरूप प्रदर्शित करना आवश्यक है।
वर्तमान नियमों के तहत आम नागरिक, निजी संगठन और शैक्षणिक संस्थान भी राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकते हैं, लेकिन इसे हमेशा राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान के अनुरूप ही प्रदर्शित करना होता है।
राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हुआ तो तीन साल तक सजा
प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हाॅनर एक्ट, 1971 की धारा 2 के तहत सार्वजनिक स्थान या सार्वजनिक दृष्टि में राष्ट्रीय ध्वज को जलाना, क्षतिग्रस्त करना, विकृत करना, अपमानित करना, नष्ट करना, रौंदना अथवा अन्य तरीके से उसके प्रति अनादर या अवमानना प्रदर्शित करना अपराध है। इसके लिए तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।
हालांकि केवल किसी फटे ध्वज का दिखाई देना अपने-आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक दोषसिद्धि साबित नहीं करता। मामले में यह जांच का विषय होगा कि ध्वज किसने लगाया, उसकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी थी और क्षतिग्रस्त होने के बाद उसे हटाने या बदलने के लिए क्या कदम उठाए गए।
‘हर घर तिरंगा’ के बाद बढ़ा प्रदर्शन, लेकिन सम्मान की जिम्मेदारी भी जरूरी
पहले राष्ट्रीय ध्वज को लेकर लोगों में विशेष अनुशासन और सम्मान का भाव दिखाई देता था। स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर ध्वजारोहण के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार ध्वज को सम्मानपूर्वक संभाला जाता था। अब घरों, दुकानों और संस्थानों में तिरंगा लगाने की अनुमति और प्रोत्साहन से इसकी पहुंच व्यापक हुई है, लेकिन इसके साथ ध्वज की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
झलप की घटना इसी जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करती है। देशभक्ति के प्रतीक को केवल लगाने तक सीमित रखने के बजाय उसकी स्थिति और सम्मान की निगरानी भी जरूरी है।
समिति की भूमिका पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि ग्रामीण विकास समिति में वर्तमान सरपंच, पूर्व सरपंच और उपसरपंच सहित प्रभावशाली लोग जुड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि समिति गांव में कई विवादों के निपटारे में हस्तक्षेप करती है और कुछ मामलों में दंड तथा रकम वसूली की प्रक्रिया भी होती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ऐसे में सवाल यह है कि दूसरों को नियम-कायदे समझाने और गांव में फैसले लेने वाली समिति के भवन पर ही राष्ट्रीय ध्वज नियमों की अनदेखी क्यों हुई? क्या समिति के जिम्मेदारों को फटे तिरंगे की स्थिति दिखाई नहीं दी या फिर इसे नजरअंदाज कर दिया गया?
अब कार्रवाई किसकी जिम्मेदारी?
मामला सामने आने के बाद प्रशासन को यह देखना होगा कि ग्रामीण विकास समिति भवन पर राष्ट्रीय ध्वज किसकी अनुमति और जिम्मेदारी में लगाया गया था। यदि ध्वज वास्तव में क्षतिग्रस्त होने के बाद भी जानबूझकर या लापरवाही से प्रदर्शित किया जाता रहा, तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच जरूरी है।
राष्ट्रीय ध्वज केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। झलप में फटे तिरंगे का इस तरह लटकते रहना सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि उन जिम्मेदारियों पर भी सवाल है जो तिरंगे को सम्मान के साथ प्रदर्शित करने के बाद उसकी गरिमा बनाए रखने से जुड़ी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में केवल तिरंगा उतरवाकर मामला खत्म करता है या नियमों के उल्लंघन की जिम्मेदारी भी तय करता है।

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