58 हजार बेरोजगार, 25 हजार स्नातक-स्नातकोत्तर और 12 हजार तकनीकी डिग्रीधारी
कांग्रेस नेता आलोक चंद्राकर का आरोप- तीन साल होने को आए, एक लाख सरकारी भर्ती का वादा अब तक अधूरा
महासमुंद। प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव एवं जीव-जंतु कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ शासन के उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर ने साय सरकार पर युवाओं के साथ रोजगार के नाम पर छल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार के रोजगार संबंधी दावों की पोल जिला रोजगार कार्यालय के आंकड़े ही खोल रहे हैं। महासमुंद जिले में 58 हजार से अधिक बेरोजगार पंजीकृत हैं। इनमें करीब 25 हजार स्नातक-स्नातकोत्तर तथा 12 हजार तकनीकी डिग्रीधारी युवा शामिल हैं। उच्च शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं।
चंद्राकर ने कहा कि भाजपा ने सरकार बनने के दो वर्ष के भीतर एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती का वादा किया था, लेकिन तीन साल होने को हैं और यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 1 लाख 10 हजार से अधिक शासकीय पद रिक्त हैं। इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल रिक्त पदों पर भर्ती शुरू कर युवाओं को रोजगार का ठोस अवसर देना चाहिए।
डिग्री लेकर भी बेरोजगार, पलायन को मजबूर युवा
चंद्राकर ने बस्तर की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि नक्सली हिंसा के चुनौतीपूर्ण माहौल में शिक्षा हासिल करने वाले लगभग 2 लाख आदिवासी युवा आज रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण उन्हें गांव-घर छोड़कर बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल महासमुंद की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में युवाओं के सामने खड़े रोजगार संकट को दर्शाती है।
कम वेतन और अस्थायी नौकरी से नहीं थम रहा पलायन
कांग्रेस नेता ने प्रशासन द्वारा आयोजित रोजगार मेलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार मेलों में कई बार 10 से 12 हजार रुपए के वेतन पर लंबी अवधि तक काम करने की शर्तें सामने आती हैं। निजी कंपनियों में नौकरी मिलने के बाद भी कुछ समय में युवाओं को हटा दिए जाने की शिकायतें रहती हैं। उन्होंने कहा कि कम वेतन, अधिक कार्य अवधि और रोजगार की अस्थिरता के कारण युवा ऐसे अवसरों में रुचि नहीं ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिले में औद्योगिक विकास की रफ्तार धीमी होने तथा नए उद्योगों की कमी के कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए रायपुर, भिलाई, दुर्ग और अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
कौशल प्रशिक्षण के बाद भी ऋण नहीं, स्वरोजगार पर संकट
चंद्राकर ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं के तहत प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को भी रोजगार और स्वरोजगार के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है। कई युवा अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन बैंकों से ऋण नहीं मिलने के कारण उनके सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर युवाओं को प्रशिक्षण, ऋण और बाजार, तीनों स्तर पर सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद में बेरोजगारी का संकट केवल मजदूर वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षित और तकनीकी डिग्रीधारी युवा भी इसकी चपेट में हैं। यदि समय रहते सरकारी रिक्तियों पर भर्ती और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं किए गए तो युवाओं में हताशा और पलायन दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल तेज करने, नए उद्योग स्थापित करने और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर तैयार करने की मांग की।
