नवमी पर गूंजे मंत्र, धधकी हवन की अग्नि; भक्ति में डूबा महासमुंद

महामाया मंदिर में विधि-विधान से हवन-पूजन, पंडालों में उमड़ी श्रद्धा
महासमुंद। शंख-घंटियों की गूंज, मां के जयकारों से गुंजायमान पंडाल और हवन कुंड से उठती सुगंधित धूप-धूनी…शारदीय नवरात्र की नवमी पर महासमुंद पूरी तरह भक्तिरस में डूबा नजर आया। नगर की कुल देवी मां महामाया मंदिर से लेकर शहर के दुर्गा पंडालों तक सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन और महाआरती का दौर चला। नौ दिनों की आराधना के अंतिम पड़ाव पर भक्तों ने मां से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
नवरात्रि के चलते शहर के देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह-शाम दुर्गा सप्तशती के पाठ, भजन-कीर्तन और महाआरती से माहौल पहले से ही भक्तिमय बना हुआ है। नवमी पर विभिन्न स्थानों पर विधि-विधान से हवन-पूजन किया गया।
हाउसिंग बोर्ड में मातृशक्ति के हाथों दुर्गोत्सव
हाउसिंग बोर्ड पं. दीनदयाल उपाध्याय कॉलोनी में इस बार भी मां कात्यायनी दुर्गोत्सव महिला समिति ने आयोजन की पूरी जिम्मेदारी संभाली है। महिलाओं की अगुवाई में आयोजित इस दुर्गोत्सव में पूरी कॉलोनी की सामूहिक भागीदारी देखने को मिल रही है। युवा और बच्चे भी पूजा की व्यवस्थाओं से लेकर सेवा कार्यों तक में उत्साह के साथ जुटे हैं।
सप्तमी पर मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद महाआरती हुई। अष्टमी पर मां महागौरी की आराधना कर उन्हें 56 भोग अर्पित किया गया।
नवमी पर हवन के बाद भंडारा, दशहरा पर राम-रावण युद्ध
महिला समिति के सदस्यों द्वारा नवमी पर दोपहर 3 बजे से दुर्गा पंडाल में हवन-पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। विजयादशमी के दिन कॉलोनी के युवा राम-रावण युद्ध का मंचन करेंगे और इसके बाद रावण दहन किया जाएगा। 21 अक्टूबर की सुबह विधि-विधान से माता की विदाई होगी।
नवरात्रि के समापन की ओर बढ़ते शहर में एक ओर मां दुर्गा की विदाई की तैयारियां हैं, तो दूसरी ओर विजयादशमी के रावण दहन को लेकर उत्साह चरम पर पहुंच गया है। भक्ति और उल्लास के इस संगम में महासमुंद एक बार फिर पर्व की रंगत में रंगने को तैयार है।

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