भक्ति के रंग में रंगा शहर, अब रावण दहन के उल्लास की बारी

नया रावणभाठा में 40 फीट के रावण का होगा दहन, लाइट-साउंड के बीच रामलीला; इमलीभांठा में 31वां दशहरा
महासमुंद। मां दुर्गा की आराधना में डूबे शहर में अब विजयादशमी के उल्लास की आहट सुनाई देने लगी है। कहीं रामलीला के संवाद गूंजेंगे तो कहीं रावण के पुतले के साथ बुराई का प्रतीक भी धू-धूकर जलेगा। नवरात्रि की भक्ति के बीच शहर में दशहरा उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। नया रावणभाठा स्थित पं. जयलाल प्रसाद शर्मा दशहरा मैदान में इस बार 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन आकर्षक आतिशबाजी के बीच किया जाएगा। इससे पहले दिशा नाट्य मंच के कलाकार लाइट और साउंड के प्रभाव के साथ रामलीला का मंचन करेंगे।
दशहरा रामायण समिति एवं रामायण मंडली मानस भवन की बैठक स्वाध्याय केंद्र में आयोजित कर आयोजन की रूपरेखा तय की गई। रावण के पुतले का निर्माण काली मंदिर के पास किया जा रहा है। शाम 5 बजे से रामलीला का मंचन शुरू होगा। भगवान राम द्वारा अग्निबाण चलाकर रावण दहन के साथ आतिशबाजी की जाएगी।
प्रशासन ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान
दशहरा उत्सव आयोजन समिति के प्रभारी चंद्रशेखर साहू ने बताया कि आयोजन को देखते हुए नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग द्वारा मैदान की साफ-सफाई तथा बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है। विद्युत विभाग प्रकाश व्यवस्था संभालेगा। हर साल की तरह इस बार भी हजारों लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
इमलीभांठा में 31 साल से कायम परंपरा
इमलीभांठा में इस वर्ष दशहरा उत्सव का 31वां आयोजन होगा। 20 अक्टूबर की शाम 6 बजे दशहरा मैदान में रावण दहन किया जाएगा। आयोजन समिति के सदस्य कृष्णा चंद्राकर, राजेश चंद्राकर और राहुल चंद्राकर ने बताया कि कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रावण दहन के बाद आतिशबाजी भी होगी।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी दशहरा उत्सव को लेकर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह है। यहां कॉलोनी के बच्चे ही रामलीला का मंचन कर रावण दहन करेंगे।
चार दशक पुराना मैदान, अब बढ़ती भीड़ के आगे पड़ रहा छोटा
नया रावणभाठा का मैदान कभी शहर की आबादी से दूर था, लेकिन चार दशक में शहर का विस्तार इस कदर हुआ कि मैदान अब चारों तरफ से आबादी से घिर चुका है। रामलीला और रावण दहन देखने हर साल उमड़ने वाली हजारों की भीड़ के सामने मैदान छोटा पड़ने लगा है। कार्यक्रम के दौरान और समाप्ति के बाद यातायात का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बनती है। दशहरा उत्सव समिति के प्रमुख सीएस साहू ने बताया कि पिछले वर्ष तत्कालीन एसडीएम के समक्ष नए मैदान की जरूरत का मुद्दा उठाया गया था। मिनी स्टेडियम में आयोजन कराने का विकल्प भी सामने आया था, लेकिन अधिकारी के तबादले के बाद प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। उनका कहना है कि शहर की मौजूदा आबादी और दशहरा उत्सव में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए कम से कम छह एकड़ का सुव्यवस्थित मैदान जरूरी है।

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