बारिश ने बिगाड़ा सब्जियों का गणित, रसोई का बजट हुआ बेपटरी

थोक बाजार में 70 फीसदी सब्जियां बाहर से आ रहीं, मुनगा 80 तो सेमी 100 रुपए किलो तक; 15-20 दिन बाद स्थानीय आवक बढ़ने पर राहत की उम्मीद
महासमुंद। पिछले दिनों हुई बारिश का असर अब भी सब्जियों के बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। स्थानीय उत्पादन और आवक प्रभावित होने से महासमुंद के थोक सब्जी बाजार की निर्भरता बाहरी क्षेत्रों पर बढ़ गई है। वर्तमान में बिन्नी बाई सब्जी बाजार में पहुंचने वाली कुल सब्जियों में करीब 70 प्रतिशत आवक बाहर से हो रही है, जबकि स्थानीय स्तर से महज 30 प्रतिशत सब्जियां ही बाजार तक पहुंच रही हैं। बाहरी आवक, परिवहन खर्च और कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर अब सब्जियों के खुदरा दाम पर पड़ रहा है। नतीजा यह है कि महंगी सब्जियों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
सब्जी व्यवसायी संघ के अध्यक्ष संतोष चंद्राकर के अनुसार बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर सब्जियों की उपलब्धता और आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते बाजार में बाहरी क्षेत्रों से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता बढ़ी है। वर्तमान में बिन्नी बाई सब्जी बाजार में रोजाना करीब 70 से 80 टन सब्जियों की आवक हो रही है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत सब्जियां बाहर से आ रही हैं। फूलगोभी, खट्टा बैंगन, परवल, शिमला मिर्च, गाजर, ग्वार फली, टमाटर और कुम्हड़ा सहित कई सब्जियों के लिए बाहरी मंडियों पर निर्भरता बनी हुई है। स्थानीय आवक में फिलहाल हरी पत्तेदार सब्जियों की हिस्सेदारी अधिक है।
मुनगा 80, सेमी 100 रुपए तक पहुंची
बाजार में कई सब्जियों के दाम आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। वर्तमान में बैंगन 20 रुपए, भिंडी 40, फूलगोभी 45, पत्तागोभी 30, टमाटर 20, लौकी 20, मुनगा 80, धनिया 100, अदरक 80, मिर्ची 50, शिमला मिर्च 40 से 50, गाजर 30, बरबट्टी 40, करेला 50, कुम्हड़ा 10, परवल 60, सेमी 80 से 100 और मूली 15 से 20 रुपए किलो बिक रही है।
बढ़ी कीमतों ने गृहिणियों का बजट बिगाड़ा
सब्जियों की बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ रहा है। पहले से खाद्यान्न, खाद्य तेल, दाल और अन्य जरूरी सामान की कीमतों से जूझ रहे परिवारों के लिए सब्जियों के बढ़े दाम अतिरिक्त बोझ बन गए हैं। गृहिणियों का कहना है कि रोजाना के भोजन में हरी सब्जियां जरूरी हैं, लेकिन कीमतें बढ़ने के कारण सीमित बजट में जरूरत के मुताबिक सब्जियां खरीदना मुश्किल हो रहा है। कई परिवार अब महंगी सब्जियों की जगह अपेक्षाकृत सस्ती सब्जियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
15-20 दिन बाद मिल सकती है राहत
सब्जी व्यवसायी संघ के अध्यक्ष संतोष चंद्राकर ने बताया कि बारिश का असर अभी भी सब्जियों की स्थानीय आवक पर बना हुआ है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले 15 से 20 दिनों में स्थानीय सब्जियों की आवक बढ़ने की उम्मीद है। दीपावली के आसपास स्थानीय उत्पादन बाजार में पर्याप्त मात्रा में पहुंचने लगा तो बाहरी आवक पर निर्भरता घटेगी और सब्जियों के दामों में कमी आने की संभावना है।
दो दिन बंद रहेगा सब्जी बाजार, समितियों को पहले करनी होगी खरीदी
नवरात्रि के धार्मिक आयोजनों के बीच सब्जी बाजार के दो दिन बंद रहने से लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। सप्तमी पर दुर्गा मंदिरों में छप्पन भोग और महाआरती जैसे आयोजन होंगे। अष्टमी पर मंदिरों व दुर्गा पंडालों में हवन-पूजन तथा नवमी पर भंडारे आयोजित किए जाएंगे। नवमी और दशहरा के अवसर पर सब्जी बाजार बंद रहेगा। ऐसे में भंडारा आयोजित करने वाली समितियों को एक दिन पहले ही सब्जियों की खरीदारी करनी होगी। बाजार बंद रहने से खासकर भंडारा समितियों को अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ेगी।