चैतन्य देवियों की झांकी में दिखा नारी शक्ति का दिव्य स्वरूप

राजयोग साधना से आत्मिक शक्ति और सकारात्मकता का संदेश, पांच दिवसीय झांकी देखने उमड़ रहे श्रद्धालु
महासमुंद। नवरात्रि के पावन पर्व पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में तुमगांव रोड स्थित स्थानीय सेवाकेंद्र उपकार भवन में पांच दिवसीय चैतन्य देवियों की झांकी सजाई गई है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली इस विशेष झांकी में इस बार भी श्रद्धा, आध्यात्मिकता और नारी शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 9.30 बजे तक श्रद्धालु एवं आमजन झांकी का अवलोकन कर रहे हैं।
झांकी के साथ चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से अष्ट शक्तियों की पुनः प्राप्ति का रहस्य भी समझाया जा रहा है। ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा चैतन्य देवियों की झांकी के उद्देश्य और इसके आध्यात्मिक महत्व की जानकारी भी दी जा रही है।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
चैतन्य देवियों की झांकी का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि मनीषा ठाकुर रावटे, सेनानी 20वीं वाहिनी, अश्वनी पूजा तिर्की एवं दिनेश्वरी नंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने बताया कि चैतन्य देवियों की झांकी के पीछे केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि मनुष्य को अपने भीतर छिपी दिव्य शक्तियों का एहसास कराना भी उद्देश्य है। ब्रह्माकुमारी बहनें महीनों की तपस्या और नियमित राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से शरीर और मन की एकाग्रता को साधती हैं। राजयोग साधना से मन और शरीर पर नियंत्रण बढ़ता है तथा व्यक्ति नकारात्मक विचारों से ऊपर उठकर शांति, पवित्रता, प्रेम और सकारात्मकता को जीवन में अपना सकता है।
देवी केवल मूर्ति में नहीं, हर मनुष्य के भीतर
चैतन्य झांकी के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि दैवी गुण केवल देवी-देवताओं की मूर्तियों में ही नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान हैं। आवश्यकता केवल उन्हें जागृत करने की है। झांकी लोगों को अपनी आंतरिक नकारात्मकता, अवगुण और विकारों को त्यागकर पवित्रता, शांति, प्रेम और दिव्य गुणों को अपनाने की प्रेरणा दे रही है।
झांकी में विभिन्न देवी स्वरूपों के माध्यम से उनके आध्यात्मिक गुणों को भी प्रदर्शित किया गया है। मां शैलपुत्री स्थिरता, मां ब्रह्मचारिणी पूर्ण पवित्रता और मां चंद्रघंटा आंतरिक शांति की प्रतीक के रूप में संदेश देती हैं। वहीं मां दुर्गा को अपने भीतर छिपे दुर्गुणों का नाश करने वाली शक्ति तथा मां लक्ष्मी को परमात्म ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक बताया गया है।
नारी शक्ति को पहचानने का संदेश
चैतन्य देवियों की यह झांकी नारी के भीतर मौजूद वास्तविक शक्ति को उजागर करने का भी माध्यम बनी है। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि जब नारी आध्यात्मिक शक्ति, पवित्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक गुणों से संपन्न होती है तो वह स्वयं के साथ-साथ परिवार और समाज को भी नई दिशा दे सकती है। झांकी के माध्यम से श्रद्धालुओं को बाहरी आडंबर के बजाय अपने भीतर की दैवी शक्ति को जागृत करने का संदेश दिया जा रहा है।

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