छिंदनार क्षेत्र में धान फसल पर ’’गाल मिज’’ कीट का प्रकोप, कृषि दल ने किया निरीक्षण
दंतेवाड़ा, 08 सितम्बर 2026/जिले के विकासखंड गीदम के ग्राम छिंदनार एवं आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल पर गाल मिज कीट के प्रकोप की सूचना मिलने पर उप संचालक कृषि, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों के संयुक्त दल ने प्रभावित क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण आज किया गया। मौसम में उतार-चढ़ाव एवं अत्यधिक उमस के कारण फसलों में कीट का प्रभाव देखा जा रहा है। निरीक्षण के दौरान कृषि दल ने खेतों में पहुंचकर फसलों की स्थिति का जायजा लिया तथा किसानों से चर्चा कर गाल मिज कीट के लक्षण, फसल को होने वाले नुकसान एवं रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस कीट की इल्ली धान के तने के अंदर प्रवेश कर पौधे के बढ़वार बिंदु को नुकसान पहुंचाती है। इससे सामान्य कल्ले नहीं फूटते तथा मुख्य गोभ चमकीली, पतली और खोखली नली के रूप में दिखाई देती है, जिसे सिल्वर शूट कहा जाता है। प्रभावित कल्ले में बाली नहीं निकलती, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कृषि विभाग एवं वैज्ञानिकों ने किसानों को कीट नियंत्रण के लिए जैविक एवं समन्वित उपाय अपनाने की सलाह दी। प्रारंभिक अवस्था में नीम तेल अथवा नीम बीज की गिरी के अर्क का छिड़काव करने, आवश्यकता अनुसार ब्रह्मास्त्र एवं नीमास्त्र का उपयोग करने की जानकारी दी गई। साथ ही जैविक नियंत्रण के लिए ब्युवेरिया बेसियाना जैसे जैविक कवक का उपयोग तथा खेतों में मित्र कीटों के संरक्षण पर जोर दिया गया।
कृषि दल ने किसानों को प्रकाश प्रपंच का उपयोग करने, खेत में लगातार पानी जमा नहीं रहने देने तथा आवश्यकता अनुसार कुछ दिनों के लिए पानी निकालकर खेत को सुखाने की सलाह दी। मेड़ों पर उगी अनावश्यक घास, विशेषकर दूब घास की नियमित सफाई करने के निर्देश भी दिए गए। उप संचालक कृषि ने बताया कि गाल मिज कीट की रोकथाम के लिए जिले के 46 जैव संसाधन केंद्रों में जैविक दवा तैयार की जा रही है। किसान अपने नजदीकी जैव संसाधन केंद्र से अनुदान पर जैविक दवा प्राप्त कर खेतों में छिड़काव कर सकते हैं। कृषि विस्तार अधिकारियों को छिंदनार एवं आसपास के प्रभावित ग्रामों में सतत निगरानी रखने तथा किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में गाल मिज के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि अधिकारियों से संपर्क करें और वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए जैविक एवं समन्वित उपायों को अपनाकर फसल को संभावित नुकसान से बचाएं।
