जेल की सलाखों के बीच सजा भाई-बहन के प्रेम का रंग
383 बहनों ने 217 बंदी भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र, भावुक हुए भाई-बहन; 10-10 के समूह में हुई मुलाकात
महासमुंद। जेल की ऊंची दीवारें और कड़ी सुरक्षा भी भाई-बहन के अटूट प्रेम को नहीं रोक सकीं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जिला जेल महासमुंद में भावुक माहौल देखने को मिला। जेल में निरुद्ध 743 बंदियों में से 217 बंदियों से मिलने के लिए 383 बहनें पहुंचीं। लंबे इंतजार के बाद जब बहनों को अपने भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर राखी बांधने का अवसर मिला तो खुशी और भावनाओं का अनूठा संगम नजर आया। बहनों ने भाइयों को राखी बांधकर मिठाई खिलाई और उनके सुखद भविष्य की कामना की।
सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक विशेष मुलाकात व्यवस्था
रक्षाबंधन पर बंदियों को बहनों से मिलवाने और राखी बंधवाने के लिए जेल प्रबंधन ने विशेष व्यवस्था की थी। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक जेल मेनगेट और लालगेट के बीच मुलाकात की व्यवस्था की गई। दूर-दराज से पहुंचे परिजनों की सुविधा के लिए जेल परिसर में पेयजल और छाया का इंतजाम किया गया था।
भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए बहनों को एक साथ प्रवेश देने के बजाय 10-10 के समूह में जेल के अंदर भेजा गया। प्रत्येक बहन को अपने भाई से मिलने के लिए अधिकतम 10 मिनट का समय निर्धारित किया गया था।
चप्पे-चप्पे पर रही सुरक्षा
मुलाकात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए जेल के प्रहरी और मुख्य प्रहरी सहित सुरक्षा स्टाफ को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया था। पुलिस प्रशासन की ओर से 6 पुरुष और 4 महिला आरक्षक भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए। जेल के चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ की मौजूदगी में पूरा आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
बहनों के जेल परिसर में प्रवेश से लेकर मुलाकात के बाद बाहर निकलने तक सुरक्षा कर्मियों ने लगातार निगरानी रखी। भीड़ नियंत्रण और निर्धारित समय-सीमा का पालन कराने के लिए जेल परिसर के चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात रहे। जेल अधीक्षक अश्विनी पूजा तिर्की ने स्वयं मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी की।
घंटों इंतजार के बाद भाई को देखा तो छलक उठीं आंखें
रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनें दूर-दूर से जिला जेल पहुंचीं। घंटों इंतजार के बाद जब भाई सामने आया तो बहनों के चेहरे पर खुशी और आंखों में भावनाओं की चमक दिखाई दी। सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए बहनों ने भाइयों को राखी बांधी, मिठाई खिलाई और कुछ पल साथ बिताए।
जिनकी बहनें नहीं पहुंच सकीं, उनके लिए भी विशेष इंतजाम
जेल प्रबंधन ने उन बंदियों का भी विशेष ध्यान रखा, जिनकी बहनें किसी कारणवश जेल नहीं पहुंच सकीं। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय और गायत्री परिवार की बहनों ने जेल पहुंचकर ऐसे बंदियों की कलाई पर राखी बांधी।
वहीं, दूसरे राज्यों में रहने वाले ऐसे बंदी, जिनकी बहनें दूरी या अन्य कारणों से जेल नहीं आ सकीं, उन्हें प्रिजन कॉलिंग सुविधा के माध्यम से बहनों से बातचीत कराई गई। फोन पर बहनों की आवाज सुनते ही कई बंदी भावुक हो उठे। इस तरह जेल की सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी रक्षाबंधन ने भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट और भावनाओं को जीवंत कर दिया।
