गौरव पथ पर ‘गौरव’ नहीं, मवेशियों का कब्जा!
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सड़कों पर दिनभर डेरा, हादसों का बढ़ा खतरा; हाईकोर्ट के आदेश भी बेअसर- जिम्मेदारों की आंखों के सामने शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी
महासमुंद। शहर के प्रमुख और व्यस्ततम मार्गों में शुमार गौरव पथ इन दिनों अपने नाम के ठीक उलट तस्वीर पेश कर रहा है। यहां दिनभर आवारा मवेशियों का डेरा लगा रहता है। सड़क के बीचों-बीच बैठे और झुंड में घूमते मवेशियों के कारण वाहन चालकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि इसी मार्ग से जिले के तमाम बड़े अधिकारी दिनभर गुजरते हैं, लेकिन सड़कों पर पसरी इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदारों की नजर पड़ती दिखाई नहीं दे रही है।
“गर्व कीजिए, आप गौरव पथ पर हैं”- शहर की इस प्रमुख सड़क पर यह बात अब व्यवस्था पर सवाल खड़े करती नजर आती है। गौरव पथ से लेकर नेशनल हाईवे-353 तक सड़कों पर मवेशियों का कब्जा आम हो गया है। खासकर विधायक कार्यालय के सामने एनएच-353 पर भी मवेशियों के झुंड दिनभर सड़क पर बैठे नजर आते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक मवेशियों के आ जाने से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।
हर प्रमुख सड़क पर मवेशियों का डेरा
महासमुंद शहर से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे-353, गौरव पथ सहित शहर की प्रमुख सड़कों और गली-मोहल्लों तक यही स्थिति दिखाई देती है। रायपुर रोड, बिठौबा टॉकीज चौक, आंबेडकर चौक, स्वामी चौक, नेहरू चौक, कचहरी चौक, बरोंडा चौक, शास्त्री चौक, गौरव पथ, विधायक कार्यालय के सामने, स्टेट बैंक क्षेत्र, बिजली कार्यालय, मंडी रोड और पिटियाझर सहित कई स्थानों पर दिनभर मवेशियों के झुंड सड़क पर बैठे अथवा घूमते नजर आते हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि कई जगह मवेशी सड़क के बीचों-बीच बैठ जाते हैं। वाहन चालक उन्हें बचाने के लिए अचानक दिशा बदलने को मजबूर होते हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। व्यस्त मार्गों पर यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
एक ओर सड़क पर मवेशी, दूसरी ओर गौठान वीरान
शहर में आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान करने के लिए व्यवस्थाएं मौजूद होने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। पिटियाझर में नगर पालिका द्वारा बनाए गए गौठान में जहां सन्नाटा पसरा दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों पर मवेशियों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। सवाल यह है कि जब मवेशियों को रखने के लिए व्यवस्था की गई है तो फिर उन्हें सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर रखने की प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही है?
हाईकोर्ट के आदेश का भी असर नहीं?
आवारा मवेशियों को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। जिला प्रशासन और नगर पालिका द्वारा समय-समय पर अभियान चलाकर सड़कों से मवेशियों को हटाने की कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बार-बार अभियान चलाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है? क्या कार्रवाई केवल कुछ घंटों या दिनों तक सीमित रहने के लिए है? यदि मवेशियों को पकड़ने के बाद उनके रखरखाव और पुनः सड़कों पर न आने की व्यवस्था नहीं होगी, तो अभियान का स्थायी परिणाम कैसे मिलेगा?
अधिकारी रोज गुजरते हैं, फिर भी समस्या नजर नहीं आती!
गौरव पथ शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से स्कूल, कलेक्ट्रेट, जिला न्यायालय और विभिन्न सरकारी कार्यालयों तक पहुंचा जाता है। जिले के अधिकारी और कर्मचारी भी प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरते हैं। इसके बावजूद सड़क पर डेरा जमाए मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शहरवासियों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी यदि कुछ मिनट रुककर गौरव पथ और प्रमुख चौक-चौराहों की स्थिति देख लें तो समस्या की गंभीरता खुद सामने आ जाएगी। केवल कार्यालयों में बैठकर कार्रवाई की समीक्षा करने के बजाय सड़क पर उतरकर वास्तविक स्थिति देखने की जरूरत है।
हादसों के बाद भी नहीं जाग रहा प्रशासन
गौरव पथ और शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर मवेशियों के कारण पूर्व में भी हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद सड़क पर बैठे मवेशियों को लेकर ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। बरसात के मौसम में सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण दृश्यता कम होने तथा वाहन फिसलने की स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल
शहर की साफ-सफाई, यातायात में बाधा पैदा करने वाले मवेशियों को हटाने और उनके लिए निर्धारित व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की है। ऐसे में लगातार सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
शहरवासियों की मांग है कि नगर पालिका केवल दिखावे की कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों की नियमित धरपकड़, उनके लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था, पशुपालकों पर प्रभावी कार्रवाई और निगरानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे।
शहर पूछ रहा सवाल-आखिर कब हटेंगे सड़कों से मवेशी?
महासमुंद की सड़कों पर मवेशियों का बढ़ता जमावड़ा अब महज अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि यातायात सुरक्षा और आम नागरिकों की जान से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। जब प्रमुख मार्गों पर दिनभर मवेशियों का कब्जा हो, गौठान खाली पड़े हों और बार-बार कार्रवाई के बावजूद स्थिति नहीं सुधरे, तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
अब जरूरत खानापूर्ति की कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की है। जिला प्रशासन और नगर पालिका को यह सुनिश्चित करना होगा कि गौरव पथ सहित शहर की प्रमुख सड़कों को आवारा मवेशियों से मुक्त कराया जाए, ताकि शहरवासियों को सुरक्षित यातायात मिल सके और किसी बड़े हादसे का इंतजार न करना पड़े।
टीम बनाया गया है। पकड़ कर गौठान और कृषि उपज मंड़ी रखने की व्यवस्था की गई है। 3-4 पशुपालकों को नोटिस दिया गया है। पहली बार समझाइश दिया जा रहा है। दूसरी बार में जुर्माना करेंगे, और तीसरी दफा पकड़े जाने पर मामला कोर्ट में पेश किया जाएगा।
सौरभ शर्मा, सीएमओ, नगर पालिका परिषद महासमुंद
