तीन महीने कोदो-कुटकी-रागी खाइए, बीमारी दूर भगाइए”: पद्मश्री डॉ. खादर वली

महासमुंद में श्री अन्न पर कार्यशाला, प्राकृतिक खेती और मिलेट्स उत्पादन बढ़ाने पर जोर; किसानों ने टिकाऊ कृषि अपनाने का लिया संकल्प
महासमुंद। जिले में श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन, उपयोग और पोषण संबंधी महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में “स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि के लिए श्री अन्न (मिलेट्स) एक वरदान हैं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड, जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में शामिल देश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एवं पद्मश्री डॉ. खादर वली ने कहा कि श्री अन्न भविष्य की खेती और स्वस्थ भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा, “तीन महीने कोदो, कुटकी और रागी का नियमित सेवन कीजिए, बीमारी से छुटकारा मिलेगा। पारंपरिक अनाज को फिर से अपने रसोईघर में स्थान दें।” उन्होंने बताया कि वे मैसूर (कर्नाटक) से हैं और पिछले 30 वर्षों से मिलेट्स पर शोध कर रहे हैं।
डॉ. वली ने कहा कि कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसे श्री अन्न फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने, कम लागत और कम पानी में मिलेट्स उत्पादन बढ़ाने तथा प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।
छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि राज्य सरकार मिलेट्स खेती को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। वहीं बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और उत्पादन की खरीदी का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद, कृषि उप संचालक एफ.आर. कश्यप, येतराम साहू, महेंद्र जैन, महेंद्र चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। संवाद सत्र में किसानों ने प्राकृतिक खेती, बीज चयन, जल संरक्षण और विपणन से जुड़े प्रश्न पूछे। भंवरपुर के किसान संत राम पटेल ने रागी की सफल खेती का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे लगभग एक हजार क्विंटल रागी का उत्पादन कर चुके हैं। अंत में प्रतिभागियों को कोदो की खिचड़ी और रागी की खीर परोसी गई तथा जिले में श्री अन्न के रकबे और उपभोग को बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

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