लोक अदालत में चेक बाउंस के 42 मामलों का हुआ निपटारा, 1.81 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित

धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए 10 खंडपीठों का गठन, समझौते के आधार पर हुआ समाधान
महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार शनिवार को जिले में धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम (चेक अनादर/चेक बाउंस) से संबंधित मामलों के निराकरण के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के मार्गदर्शन में जिला मुख्यालय तथा तालुका न्यायालयों में कुल 10 खंडपीठों का गठन कर लंबित मामलों का सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकरण किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री चेतना ठाकुर ने बताया कि चेक बाउंस से संबंधित बढ़ते लंबित मामलों के शीघ्र एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से प्रत्येक खंडपीठ में एक-एक सुलहकर्ता सदस्य की नियुक्ति की गई थी। विशेष लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों के बीच आपसी सहमति और समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा कराया गया।
उन्होंने बताया कि विशेष लोक अदालत में कुल 42 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया, जिनमें 1 करोड़ 81 लाख 87 हजार 947 रुपये का अवार्ड पारित किया गया। इससे न केवल पक्षकारों को त्वरित न्याय मिला, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में भी महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई।
प्रभारी सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार 18 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी जिला एवं तालुका न्यायालयों में धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम से संबंधित मामलों के लिए विशेष लोक अदालत आयोजित की गई थी।
गौरतलब है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 चेक के अनादर (बाउंस) होने की स्थिति में आपराधिक दायित्व निर्धारित करती है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा जारी किया गया चेक बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण अनादृत हो जाता है, तो संबंधित जारीकर्ता के विरुद्ध इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती है। इस अपराध में न्यायालय दोषी पाए जाने पर कारावास के साथ-साथ चेक की राशि के दोगुने तक जुर्माना भी लगा सकता है।
विशेष लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का आपसी समझौते से निराकरण कर न्यायिक प्रक्रिया को सरल, त्वरित एवं प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।