आरक्षित वन में साही के अवैध शिकार, पांच आरोपी गिरफ्तार

वन विभाग की सघन कार्रवाई, शिकार किए गए साही का मांस भी बरामद
सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया
महासमुंद। वन्यजीव संरक्षण अभियान के तहत वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बागबाहरा वन परिक्षेत्र के आरक्षित वन में साही (इंडियन पॉर्कुपाइन) के अवैध शिकार के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
वनमण्डलाधिकारी मयंक पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा उपवनमण्डलाधिकारी गोविंद सिंह के नेतृत्व में वन परिक्षेत्र बागबाहरा द्वारा संचालित सघन गश्ती एवं वन्यजीव संरक्षण अभियान के दौरान यह कार्रवाई की गई। वन परिक्षेत्र अधिकारी नवीन वर्मा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने सूचना मिलने पर तत्काल जांच शुरू की। जांच के दौरान रैताल बीट के आरक्षित वन के कक्ष क्रमांक-154 में साही के अवैध शिकार की पुष्टि हुई।
विवेचना और पूछताछ में ग्राम नवाडीह (खम्हरिया) के पांच लोगों की संलिप्तता सामने आई। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने शिकार किए गए साही के मांस को काटकर आपस में बांट लिया था और अपने पास रखा हुआ था। पूछताछ के दौरान सभी आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया।
इसके आधार पर वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 2(16), 9, 39, 50 एवं 51 के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार आरोपियों में गिरधारी गोंड, लोकनाथ गोंड, नागेश्वर गोंड, सियाराम राजपूत एवं नरसिंह कुमार शामिल हैं। सभी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
इस कार्रवाई में डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा, वनरक्षक श्रीमती डीलेश्वरी कंवर, नीलकंठ दीवान, वीरेंद्र दीवान सहित वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं वन प्रबंधन समिति नवाडीह (खम्हरिया) के सदस्यों ने भी अभियान में सक्रिय सहयोग दिया।
वन विभाग ने नागरिकों से वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा है कि यदि कहीं भी वन्यजीवों के अवैध शिकार, तस्करी अथवा वन अपराध से संबंधित कोई गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव संरक्षण के लिए सघन गश्त, निगरानी और विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

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