धान मंडी में किसानों की मायूसी: खरीदार कम, दाम घटे
राइस मिलरों की उदासीनता से रबी धान की खरीदी प्रभावित, किसानों ने लगाया सांठगांठ का आरोप
महासमुंद। जिले में रबी सीजन की धान कटाई और मिंजाई का कार्य तेजी से चल रहा है। किसान अपनी उपज बेचने के लिए कृषि उपज मंडी समिति पहुंच रहे हैं, लेकिन मंडी में राइस मिलरों की कम रुचि और धान के उचित दाम नहीं मिलने से किसानों में भारी नाराजगी है। खरीदारों की कमी के कारण मंडी में धान की आवक भी प्रभावित हो रही है।
महासमुंद की नई कृषि उपज मंडी में रबी धान के क्रय-विक्रय की प्रक्रिया 7 मई 2026 से शुरू हुई है। मंडी सूत्रों के अनुसार अब तक लगभग 400 किसानों द्वारा अपनी उपज का विक्रय किया जा चुका है। मंगलवार को ग्राम बेमचा, खरोरा, परसदा और लाफिनखुर्द के करीब 25 किसान लगभग 3000 कट्टा धान लेकर मंडी पहुंचे थे।
मंडी में पतला धान 1680 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम और 1738 रुपए अधिकतम दर पर बिका, जबकि मोटा धान 1680 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया। इससे एक दिन पहले करीब 14 हजार कट्टा धान की आवक हुई थी। उस दिन मोटा धान 1641 से 1695 रुपए प्रति क्विंटल तथा पतला धान 1652 से 1730 रुपए प्रति क्विंटल तक बिका था।
धान लेकर पहुंचे किसानों ने बताया कि लगातार बढ़ती डीजल कीमतों के कारण परिवहन खर्च बढ़ गया है, वहीं हमाली दरों में भी वृद्धि हुई है। इसके बावजूद मंडी में खरीदी के लिए केवल एक-दो मिलर ही पहुंच रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा नहीं बन पा रही और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
किसानों का कहना है कि मंडी में धान बेचना उनकी मजबूरी बन गई है। यदि किसान मंडी परिसर में धान बेचते हैं तो मंडी से मिल तक परिवहन की जिम्मेदारी मिलर्स की होती है, लेकिन यदि वे सीधे मिलर्स को धान बेचते हैं तो परिवहन का पूरा खर्च किसानों को स्वयं उठाना पड़ता है। ऐसे में किसानों को कम कीमत मिलने के साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ रहा है।
किसानों ने किया खरीदी का बहिष्कार
सोमवार को भी रबी धान बेचने पहुंचे किसानों ने मंडी में खरीदी प्रक्रिया का विरोध करते हुए बहिष्कार किया था। किसानों ने राइस मिलर्स और मंडी प्रबंधन पर सांठगांठ का आरोप लगाया।
किसानों ने बताया कि मंडी में रबी धान खरीदी के लिए दो दर्जन से अधिक राइस मिलर्स का पंजीयन किया गया है, लेकिन खरीदी के समय मुश्किल से दो से चार मिलर्स ही मंडी पहुंचते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है और किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम में बेचनी पड़ती है।
सोमवार को करीब 25 से 30 किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे थे, लेकिन खरीदी के लिए केवल चार मिलर्स मौजूद थे। किसानों का आरोप है कि मिलर्स 1500 से 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक ही धान की कीमत लगा रहे थे, जबकि कुछ दिन पहले तक धान का बेहतर भाव मिल रहा था। किसानों ने प्रशासन से मंडी व्यवस्था में सुधार, पर्याप्त खरीदारों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने और धान का उचित समर्थन मूल्य दिलाने की मांग की है।
