संघर्ष से आत्मनिर्भरता तकः मुरदोण्डा की उषा कुंजाम बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

बीजापुर 21 मई 2026/छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी अंचल ग्राम मुरदोण्डा, तहसील उसूर, जिला बीजापुर की निवासी 38 वर्षीय श्रीमती उषा कुंजाम ने संघर्षों से भरे जीवन को मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई पहचान दी है। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी हैं।
उषा कुंजाम लंबे समय तक बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आय का कोई स्थायी साधन नहीं होने से जीवन काफी कठिनाइयों में बीत रहा था। सुदूर आदिवासी क्षेत्र होने के कारण रोजगार के अवसर भी सीमित थे, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानियाँ लगातार बढ़ती जा रही थीं।
इसी दौरान उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर के माध्यम से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना PMFME की जानकारी प्राप्त हुई। विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने योजना अंतर्गत ऋण के लिए आवेदन किया। सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ पूर्ण होने के बाद वर्ष 2025-26 में आईसीआईसीआई बैंक बीजापुर से उन्हें 3 लाख 90 हजार 400 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ।
इस आर्थिक सहयोग से श्रीमती उषा कुंजाम ने अपने गांव में राइस मिल तथा टोरा मिल प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की। पहले क्षेत्र में टोरा मात्र 8 से 10 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता था, जिससे ग्रामीणों को बहुत कम लाभ मिल पाता था। अब वे टोरा का प्रसंस्करण कर उससे तेल निकालती हैं, उसकी पैकेजिंग कर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर की दर से बाजार में बेचती हैं। यह तेल मंदिरों में दीप प्रज्वलन एवं पर्व, त्योहारों में अधिक उपयोग होने के कारण लगातार मांग में बना रहता है। इसके साथ ही टोरा से निकलने वाली खली को भी 12 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने राइस मिल की स्थापना कर ग्रामीणों को बड़ी सुविधा उपलब्ध कराई है। पहले गांव के लोगों को धान से चावल निकलवाने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की परेशानी होती थी। अब स्थानीय स्तर पर ही यह सुविधा मिलने से ग्रामीणों को राहत मिली है। धान से चावल निकालने के साथ-साथ ब्रान ,चोकर और भूसी की बिक्री से भी उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
अपने इस सफर में श्रीमती उषा कुंजाम को तकनीकी जानकारी की कमी, सीमित संसाधन और बाजार तक पहुंच जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। निरंतर मेहनत, धैर्य और उद्योग विभाग बीजापुर के मार्गदर्शन से आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हो चुकी है। वे नियमित रूप से बैंक की किश्त भी समय पर जमा कर रही हैं।
श्रीमती उषा कुंजाम ने अपनी सफलता का श्रेय जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर को देते हुए विभाग के सहयोग और मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार का सहयोग मिलता रहा तो वे अपने व्यवसाय का और विस्तार करेंगी। साथ ही उन्होंने क्षेत्र की अन्य महिलाओं एवं युवाओं से भी योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनने की अपील की।