सुशासन तिहार ने लौटाया लोकेश्वरी की आंखों का उजाला’

पिपरछेड़ी के समाधान शिविर में हाथों-हाथ मिला चश्मा, महतारी वंदन योजना के लाभ से संवर रही जिंदगी
रायपुर 21 मई 2026/छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही आज राज्य के दूर-दराज के गांवों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। जब शासन की मंशा जन-कल्याण की हो, तो योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि सीधे जनता के द्वार तक पहुंचती हैं। इसका एक जीवंत और प्रेरक उदाहरण श्सुशासन तिहार 2026 के दौरान ग्राम पंचायत पिपरछेड़ी में देखने को मिला, जहां आयोजित समाधान शिविर ने श्रीमती लोकेश्वरी के जीवन से धुंधलेपन को मिटाकर खुशियों का उजाला भर दिया।
’सीमित संसाधन और बढ़ती लाचारी’
ग्राम पिपरछेड़ी की रहने वाली श्रीमती लोकेश्वरी पिछले कुछ वर्षों से एक मूक परेशानी से जूझ रही थीं। उन्हें पास की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती थीं और बारीक अक्षरों को पढ़ना उनके लिए नामुमकिन सा हो गया था। इस वजह से उन्हें घर के रोजमर्रा के कामकाज निपटाने में दिक्कत होती थी। राशन कार्ड और अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों को पढ़ने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। ग्रामीण परिवेश और सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण वे शहर जाकर किसी बड़े अस्पताल में अपनी आंखों की जांच कराने का हौसला नहीं जुटा पा रही थीं। नतीजा यह हुआ कि समय के साथ उनकी यह समस्या बढ़ती चली गई और उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा।
’जब गांव में ही पहुंचा समाधान’
लोकेश्वरी के जीवन में बदलाव का मोड़ तब आया, जब उनके ही गांव में श्सुशासन तिहारश् के तहत समाधान शिविर का आयोजन किया गया। वे अपनी समस्या लेकर शिविर में पहुंचीं और स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर अपनी परेशानी बताई। आवेदन मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी संवेदनशीलता दिखाई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (ब्डभ्व्) की उपस्थिति में डॉक्टरों ने तत्काल लोकेश्वरी की आंखों का परीक्षण किया और उन्हें मौके पर ही निःशुल्क चश्मा प्रदान किया।
’चेहरे पर लौटी मुस्कान और खोया हुआ आत्मविश्वास’
जैसे ही लोकेश्वरी ने नया चश्मा पहना, उनके सामने की दुनिया एकदम साफ हो गई। पास रखी सामग्री के धुंधले अक्षर अब बिल्कुल स्पष्ट थे। अपनी आंखों में आए इस त्वरित सुधार को देखकर उनके चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास की मुस्कान लौट आई। भावुक होकर लोकेश्वरी ने कहा कि अब मुझे बहुत राहत है। जो काम पहले बोझ लगते थे, अब वे दैनिक कार्य मैं बिना किसी परेशानी के सहजता से कर पा रही हूं। यह शिविर हम जैसे ग्रामीणों के लिए भगवान के वरदान जैसा है, जहां हमारी बात सुनी भी गई और तुरंत इलाज भी मिला।
’महतारी वंदन योजना का दोहरा संबल’
लोकेश्वरी ने खुशी जाहिर करते हुए यह भी बताया कि उन्हें राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ भी हर महीने नियमित रूप से मिल रहा है। इस राशि से वे अपनी और परिवार की छोटी-मोटी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं। आंखों की रोशनी लौटने और आर्थिक संबल मिलने से अब उनका जीवन पहले से कहीं अधिक सुगम हो गया है।
उन्होंने इस संवेदनशील पहल के लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। लोकेश्वरी की यह कहानी महज एक चश्मा मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार संवेदनशील होकर काम करती है, तो अंतिम व्यक्ति तक न सिर्फ सुविधाएं पहुंचती हैं, बल्कि उनका खोया हुआ सम्मान और उम्मीद भी वापस लौट आती है। पिपरछेड़ी का यह समाधान शिविर सुशासन की इसी भावना का एक चमकता हुआ चेहरा है।