पुरुषोत्तम मास में नेमीशरण में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन

व्यासपीठ से धुरु नारायण शुक्ला ने सुनाई भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, गोवर्धन धारण प्रसंग का किया भावपूर्ण वर्णन
महासमुंद। उत्तरप्रदेश के पावन तीर्थ नेमीशरण में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्री राम जानकी मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है। कथा का रसपान श्रद्धालु प्रसिद्ध भागवताचार्य धुरु नारायण शुक्ला के श्रीमुख से कर रहे हैं। कथा आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।
कथा के दौरान व्यासपीठ से श्री शुक्ला ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब देवराज इंद्र के प्रकोप से गोकुल में मूसलाधार वर्षा होने लगी और समस्त ब्रजवासी संकट में पड़ गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर सभी ग्वाल-बालों एवं ब्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग को सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्तिभाव में सराबोर हो उठे।
भागवताचार्य श्री शुक्ला ने कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं तथा संकट की हर घड़ी में उनका सहारा बनते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, भक्ति एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
इस पावन भागवत कथा का श्रवण करने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु नेमीशरण पहुंचे हुए हैं। तुमगांव से सुनील शर्मा एवं मीना शर्मा विशेष रूप से कथा श्रवण हेतु उपस्थित रहे। इसके अलावा आरंग, मंदिर हसौद, रायपुर, बिलासपुर, बलौदा बाजार, दुर्ग एवं भिलाई सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।