अक्ति पर्व पर बेलसोंडा में सजी परंपरा की रंगीन छटा, बच्चों ने किया गुड्डा-गुड़िया विवाह उत्सव

जनपद उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर ने की सहभागिता, परंपराओं से जुड़ने का दिया संदेश
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के गौरवशाली लोक-पर्व अक्षय तृतीया (अक्ति) के अवसर पर ग्राम बेलसोंडा में पारंपरिक संस्कृति की जीवंत और आकर्षक झलक देखने को मिली। गांव की गलियों में आयोजित ‘पुतरा-पुतरी’ (गुड्डा-गुड़िया) विवाह उत्सव ने खासकर बच्चों और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बना दिया।
इस सांस्कृतिक आयोजन में महासमुंद जनपद पंचायत की उपाध्यक्ष श्रीमती हुलसी जितेन्द्र चंद्राकर ने सक्रिय सहभागिता निभाई। उन्होंने विवाह की विभिन्न रस्मों में शामिल होकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया और परंपराओं के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की। पारंपरिक बाजों की धुन पर निकली गुड्डे की बारात का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसमें श्रीमती चंद्राकर भी शामिल हुईं।
इस अवसर पर उन्होंने किसानों के साथ मिलकर नए कृषि वर्ष की सुखद और समृद्ध शुरुआत की कामना की। उन्होंने कहा कि अक्ति पर्व हमारी कृषि आधारित संस्कृति और मिट्टी से जुड़ाव का प्रतीक है, जो समाज में एकता और परंपराओं को सहेजने का संदेश देता है। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती चंद्राकर ने ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को हमारी प्राचीन परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। बेलसोंडा में आयोजित यह आयोजन सामुदायिक समरसता, सांस्कृतिक प्रेम और परंपरा संरक्षण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया।