महिला एवं बाल विकास मंत्री ने ग्राम डांगरा में कुसुम पेड़ के नीचे लगाई ’बाल

चौपाल’ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चों के साथ सहज ढंग से किया अनौपचारिक संवाद
उत्तर बस्तर कांकेर, 16 अप्रैल 2026/ प्रदेश की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज जिले के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित दुर्गूकोंदल ब्लॉक के ग्राम डांगरा में आयोजित बाल चौपाल में सम्मिलित होकर हाई स्कूल परिसर में कुसुम पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीण महिलाओं एवं बच्चां के साथ सहज ढंग से अनौपचारिक संवाद किया। इस अवसर पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा तथा राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत भी उपस्थित थीं। इस दौरान बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने बच्चों के बीच विभिन्न प्रकार की गैर शैक्षणिक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियां और खुली प्रतियोगिताएं आकर्षक ढंग से आयोजित कराई। इस दौरान प्रतिभागी बालिकाओं को महिला एवं बाल विकास मंत्री ने अपने हाथों से प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार वितरित किए।
इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और संबल हुई हैं, वहीं दैनिक जरूरतों की पूर्ति में काफी आसानी हुई है। उन्होंने मौके पर मौजूद महिलाओं को समझाइश देते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें विशेष रूप से खानपान पर ध्यान देने तथा अतिरिक्त पोषण आहार और प्रोटीन-विटामिन की आवश्यकता होती है जिससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ व निरोगी हों। इस दौरान कैबिनेट मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ग्रामीण महिलाओं से खुली चर्चा करते हुए विभाग की योजनाओं तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का लाभ लेने की अपील की। इसके पहले, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने उपस्थित बच्चों के बीच प्रेरक गतिविधियां कराई, जिसमें गुड टच-बैड टच, लोक गीत, लोक नृत्य, व्यक्तित्व विकास, दैनंदिनी से जुड़ी गतिविधियां आदि शामिल थीं, जिसमें बच्चों ने बारी-बारी से उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया तथा खुलकर अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया।
रेडी टू ईट से बनी खीर से कराया अन्नप्राशन, शिशुवती महिलाओं को भेंट की सुपोषण टोकरी
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने ग्राम डांगरा में आयोजित बाल चौपाल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की, जहां उन्होंने 03 नौनिहालों को अन्नप्राशन कराया। उन्होंने ग्राम डांगरा से आई श्रीमती सुकारो बाई की 05 माह की बेटी कु.रूही नरेटी को गोद में उठाकर रेडी टू ईट से बनी खीर खिलाकर रस्म अदायगी की। साथ ही ग्राम हिंगनपुरी की श्रीमती सुशीला बाई की पुत्री कु. वामिका उइके और ग्राम भंडारडिगी निवासी श्रीमती मधु की बेटी कु. लावण्या गावड़े का भी अन्नप्राशन रेडी टू ईट से तैयार खीर खिलाकर कराया। इसी तरह पांच शिशुवती माताओं को सुपोषण टोकरी भेंट की, जिनमें शिशु कु. काव्या दर्रो, इवांशी मरकाम, कनिका यादव, अनुज कुमार और संध्या दुग्गा की माताएं शामिल थीं।
विद्यारम्भ संस्कार प्रमाण पत्र प्रदान किया
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं अन्य अतिथियों ने 05 बच्चे विधाना मरकाम, प्रियांशी कुरेटी, विकास हिड़को, ग्रेसी निषाद और रियांशी तेता को विद्यारंभ संस्कार प्रमाण पत्र सौंपा।
मौके पर 68 महिलाओं का किया गया ई-केवायसी
बाल चौपाल कार्यक्रम के दौरान मौके पर महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं का ई-केवायसी अपडेट भी किया गया। इस दौरान कुल 68 महिलाओं का ई-केवायसी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
महिलाओं एवं बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर किया सामूहिक भोज
बाल चौपाल कार्यक्रम के उपरांत महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा और राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती राजपूत ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण महिलाओं तथा बच्चों के साथ पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर एक साथ सामूहिक भोज किया। अतिथियों को पेड़ों के पत्तों से तैयार किए गए दोना-पत्तल में दाल, चावल, कुल्थी की सब्जी, मड़िया पेज आदि पारंपरिक व्यंजन परोसा गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन, एसडीएम भानुप्रतापपुर जीडी वाहिले एवं विभाग के अधिकारी कर्मचारी, विभिन्न स्कूल से आए विद्यार्थी और काफी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। चौगेल पुनर्वास केन्द्र में आत्मसमर्पित महिलाओं से जाना हालचाल
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रवास के दौरान भानुप्रतापपुर के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने आत्मसमर्पित महिलाओं से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा केन्द्र में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा और राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती राजपूत ने भी प्रशिक्षण कक्ष में जाकर उनसे चर्चा कर समस्याएं सुनीं और इस संबंध में आवश्यक निर्देश उपस्थित अधिकारियों को दिए।