जनपद की करोड़ों की जमीन कराया जाए अतिक्रमण मुक्त: सभापति सुधा चंद्राकर
सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने की मांग, बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स और पार्किंग से बढ़ाई जा सकती है आय
महासमुंद। जनपद पंचायत की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर वर्षों से जारी अतिक्रमण और अव्यवस्था को लेकर जनपद सभापति सुधा योगेश्वर चंद्राकर ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इस बहुमूल्य जमीन का जल्द सीमांकन कर अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करते हुए इसे सुनियोजित विकास के जरिए आय का प्रमुख स्रोत बनाने पर जोर दिया है।
सभापति श्रीमती चंद्राकर ने बताया कि मुख्य बाजार स्थित जनपद की 10 से अधिक दुकानों से राजस्व वसूली का आंकड़ा हजार रुपये तक भी नहीं पहुंच पा रहा है, जो गंभीर लापरवाही और संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उच्च अधिकारी पंचायतों की आय बढ़ाने के निर्देश दे रहे हैं, तब जनपद की अपनी संपत्तियों की अनदेखी समझ से परे है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनपद पंचायत परिसर के सामने से मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी प्रतिदिन गुजरते हैं, इसके बावजूद करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण और उससे जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। हर पांच साल में जनप्रतिनिधि और अधिकारी बदलते हैं, लेकिन दशकों पुराना जर्जर जनपद भवन और अव्यवस्थित परिसर आज भी जस का तस बना हुआ है।
सभापति ने समाधान के तौर पर सुझाव दिया कि अतिक्रमण हटाकर यहां एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया जाए, जिसमें बैंक, दुकानें और कार्यालय किराये पर दिए जा सकें। साथ ही शहर की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित पार्किंग और आयोजन स्थल विकसित किए जाएं, जिससे जनपद की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल जनपद पंचायत की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि जिला मुख्यालय के सौंदर्य और सुव्यवस्थित विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
