महासमुंद में हरी खाद को बढ़ावा, 1600 हेक्टेयर का लक्ष्य तय

कृषि विभाग की किसानों को सलाह, कम लागत में बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन क्षमता
महासमुंद। कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों को हरी खाद के अधिकतम उपयोग एवं इसके उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग ने चालू सीजन के लिए 1600 हेक्टेयर में हरी खाद उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि हरी खाद ऐसी फसलें होती हैं, जिन्हें विशेष रूप से मिट्टी की उर्वरता एवं संरचना को बेहतर बनाने के लिए उगाया जाता है। इन फसलों को तैयार होने के बाद सीधे खेत में पलटकर या खाद के रूप में उपयोग कर मिट्टी में मिलाया जाता है।
उन्होंने बताया कि हरी खाद के लिए सन, ढैंचा, लोबिया, उड़द, मूंग और ग्वार जैसी दलहनी फसलें उपयुक्त होती हैं। इन फसलों की वृद्धि तेजी से होती है और कम समय में अधिक हरी जैविक सामग्री उपलब्ध हो जाती है। साथ ही इनकी उर्वरक एवं पानी की आवश्यकता भी कम होती है, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
कश्यप ने जानकारी दी कि बोआई के 35 से 40 दिनों के भीतर, फूल आने से पहले इन फसलों को खेत में पलटने पर प्रति हेक्टेयर 50 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हरी खाद के उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, वायु संचार बेहतर होता है और जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है। इसके अलावा मिट्टी की अम्लीयता एवं क्षारीयता में सुधार होता है तथा मृदा क्षरण में भी कमी आती है। हरी खाद से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या और उनकी सक्रियता बढ़ती है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति एवं फसल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।