क्रेडिट कार्ड विवाद में उपभोक्ता की जीत, बैंक को देना होगा मुआवजा
उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए ब्याज सहित राशि लौटाने और हर्जाना देने का दिया आदेश
महासमुंद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, महासमुंद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भारतीय स्टेट बैंक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला क्रेडिट कार्ड से अनधिकृत लेन-देन और शिकायत के समाधान में लापरवाही से जुड़ा हुआ था।
क्या है पूरा मामला?
परिवादी लक्ष्मीलाल पटेल, निवासी अनवरपुर, बागबाहरा, जिला महासमुंद ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उसके क्रेडिट कार्ड से 34,500 की राशि बिना अनुमति के डेबिट हो गई। मोबाइल पर मैसेज मिलने के बाद उसने तुरंत बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
परिवादी का आरोप है कि बैंक द्वारा समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। कुछ समय बाद राशि वापस हुई, लेकिन पुनः उसी प्रकार की समस्या सामने आई, जिससे उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी।
बैंक की लापरवाही साबित
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि भारतीय स्टेट बैंक द्वारा ग्राहक की शिकायत का समय पर समाधान नहीं किया गया और न ही उचित जवाब दिया गया। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से “सेवा में कमी” माना।
आयोग का आदेश
उपभोक्ता आयोग ने बैंक को निम्न निर्देश दिए कि 34,500 की राशि परिवादी को वापस की जाए। इस राशि पर 12% वार्षिक ब्याज दिया जाए। साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 5,000 का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा वाद व्यय के रूप में 5,000 का भुगतान किया जाए। देरी होने पर 100 रुपए प्रतिदिन अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी सेवा प्रदाता द्वारा लापरवाही या शिकायतों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
